ड्रैकुला शासक की खौफनाक सजाएं सुन कर ही कांप उठेगी रूह

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इम्पलीमेंट : Impalement 15वीं सदी में व्लाद तृतीय वल्लाशीअ का राजकुमार था, व्लाद को ड्रेकुला नाम से भी जाना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि वह बेहद जालिम और क्रूर था, अपराध सिद्द होने पर वह धारदार पोल को अपराधी के शरीर के आर पार करने का हुकुम सुनाता था. पोल की मोटाई कितनी होती थी कि उसे देख किसी भी इंसान की रूह कांप उठे. जिस इंसान को सजा मिलती थी उसे जबरदस्ती धारदार पोल पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था. पोल धीरे धीरे उसके शरीर को चीरता हुआ निकल जाता था. पीड़ित को पोल पर इस तरह बिठाया जाता था कि शरीर को चीरते हुए ठुड्डी पर आकर रुक जाए और फिर धीरे धीरे ठुड्डी की हड्डी को पार करें. ऐसा इसलिए क्या जाता था ताकि मुजरिम को ज्यादा समय तक पीड़ा भुगतनी पड़ेगी. इस तरह से पोल लगाने पर 3 दिन की अहिंता पीड़ा झलने के बाद आखिरकार पीड़ित की मौत हो जाती थी. कहते हैं कि व्लाद ने अपने शासनकाल में 20,000 से लेकर 30000 लोगों को यह सजा सुनाई थी. व्लाद इतना जालिम इंसान था की खाना खाते वक्त उसे ऐसा देखने में बड़ा आनंद आता था. जरा सोचिए तब हैवानियत किस कदर सिर चढ़ कर बोलती थी.

जूडस क्रैडल : Judas Cradle जूडस क्रैडल को यहूदी पालना कहां जाता है. यह देखने में तो धारदार पोल से थोड़ा कम कष्टदाई लगे. लेकिन यह इंसान को तड़पा तड़पाकर मारने वाला हथियार था. लोगों को नंगा कर के यहूदी पालने में बिठाया जाता था. यह प्रक्रिया बेहद खौफनाक होती थी पीड़ित को तीन जगह से बांधकर लटका दिया जाता था. फिर इसके नीचे यहूदी पालने को लगाया जाता था. पीड़ित को तीन जगह से बांधकर उसे खाली सीट पर लटका दिया जाता था. फिर उसके नीचे यहूदी पालने को लगाया जाता था. इस दौरान पीड़ित के पैर को रस्सी से बांध दिया जाता था. जिसे नीचे खड़े कुछ लोग पकड़े होते थे. सजा का आदेश मिलते ही लोग रस्सी को एकदम से खींचे थे. आश्चर्य की बात तो यह है कि स्त्री को उल्टा और पुरुष को सीधे इस जानलेवा हथियार पर बिठाकर सजा दी जाती थी. इस सजा के दौरान लोग घंटो रस्सी को खींचते रहते थे. कभी कभी दर्द को बढ़ाने के लिए पीड़ित पर अतिरिक्त वजन लटका दिया जाता था. कॉफिन टॉर्चर : Coffin Torture इसे कॉफिन प्रताड़ना कहा जाता है. मध्य युग में काफी प्रचलित था. अगर आपको ध्यान हो तो किसी हॉलीवुड फिल्म में आपने इस तरह से सजा देते हुए देखा होगा. पीड़ित इस को इस पिंजरे में कैद किया जाता था ताकि वह अपनी जगह से हिल भी ना सके. इसके बाद पिंजरे को किसी पेड़ से लटका दिया जाता था. इस तरह की सजा गंभीर अपराध आज के लिए दी जाती थी. पीड़ित को या तो आदमखोर जानवर काट खाते या तो वह पक्षियों का निवाला बनता था. हालांकि देखने वाले पीड़ित का दर्द बढ़ाने के लिए उस पर पत्थरों से भी हमला करते थे. द रैक : The Rack द रैक जिससे की हम सामान्य भाषा में हड्डी तोड़ कह सकते हैं मध्य युग में से प्रताड़ना को सबसे दर्दनाक माना जाता था. द रैक का एक लकड़ी का फ्रेम होता है इस में लकड़ी दो पट्टे ऐसे होते थे जो लीवर के सहारे ऊपर की ओर उठाए जाते थे. द रैक के दोनों तरफ एक लीवर होता था दोनों पट्टे पर क़िले क़िले होती थी. सजा देते वक्त इनके हाथ-पैर बांधकर उसे इस पर लिटा दिया जाता था. फिर शुरु होता था द रैक का असली खेल. द रैक के दोनों तरफ एक एक व्यक्ति लीवर को मजबूती से उठा था और जैसे-जैसे पट्टा उठता पीड़ित की हड्डिया कड़कड़ाहट की आवाज के साथ टूटती जाती. यह खेल जब तक चलता रहता जब तक पीड़ित दम नहीं तोड़ देता. द ब्रैस्ट रिपर : The Breast Ripper इस हथियार से सिर्फ महिलाओं को सजा दी जाती थी. अगर कोई महिला दूसरे पुरुष के साथ गलत संबंध बनाती पाई जाती या फिर उस पर इस तरह का आरोप साबित होता. तो ब्रैस्ट रिपर के जरिए उसे सजा दी जाती थी. रिपर को महिला के ब्रैस्ट से लगा कर जोर से दबा दिया जाता था. हालाँकि हैवानियत की इंतेहा इतनी ही नहीं थी इस हथियार को आग पर गर्म किया जाता था. इस सजा के दौरान पीड़ित के उभार को पूरी तरह से निकाल बाहर किया जाता था. इस सजा में अधिकतर स्त्रियों की मौत हो जाती थी और जो चिंता बचती थी उनकी जिंदगी मौत से बदतर होती थी. द पीअर ऑफ़ अंगुइश : The Pear Of Anguish तस्वीरों में देख आप अंदाजा लगा सकते हैं कि छोटा सा यह हथियार पीड़ित के लिए कितना कष्टदायक साबित हो सकता है. इस हथियार का इस्तेमाल बच्चा गिराने वाली महिलाओं, झूठ बोलने वालों और होमोसेक्सुअल लोगों पर होता था. यह नुकीला हत्यार ऊपर लगा पेंच घुमाने पर चार हिस्सों में बट जाता था. इस हथियार को झूठ बोलने वालों के मुंह में और महिलाओं की योनि में और होमोसेक्सुअल लोगों की गोद में डालकर उसके पेंच को घुमाया जाता था. जैसे जैसे पेंच को घुमाते यह बड़ा होता जाता जिस से पीड़ित को बहुत दर्द होता. फिर उस की खाल फट जाती और हड्डियां टूट जाती. अंत में उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी.

द ब्रेकिंग व्हील : The Breaking Wheel द ब्रेकिंग व्हील को कैथरीना व्हील के नाम से भी जाना जाता था. इस हथियार से पीड़ित जिंदा नहीं पता था. लेकिन यह उसे इतना तड़पा कर मारता था कि देखने वालों की रूह कांप उठती थी. पीड़ित को वहीं से बांधकर उस पर हथौड़े से तब तक पर वॉर किया जाता था जब तक उसके शरीर की हड्डियां टूट नहीं जाती. फिर मरने के लिए उसे छोड़ दिया जाता था. कभी-कभी पीड़ित को एक ऊंचे व्हील पर रखा जाता था. ताकि पक्षी उस टूटे इंसान की चीर फाड़ कर सके. ऐसा भी कहा जाता है कि जिन पर दया आ जाती उनके सिर्फ छाती और पीठ पर ही हथौड़े से वार किया जाता था. हालांकि पीड़ित किसी भी सूरत में जिंदा नहीं बचत. साव टॉर्चर : Saw Torture यह सजा पीड़ित को घोर वह गंभीर अपराध के लिए दी जाती थी. इसमें एक खम्बे के सहारे पीड़ित का पैर बांधकर उसे उल्टा लटका दिया जाता था. उल्टा इसलिए लटकाया जाता था ताकि उसके दिमाग की ब्लड सप्लाई चालू रहे और वह इंसान ज्यादा समय तक जिंदा रहे. उसके बाद एक बड़ी आरी लेकर उसको बीच में से धीरे-धीरे काटा जाता था. किसी किसी मुजरिम का ही पूरा हिस्सा काटा जाता था. अधिकतर को तो केवल काट कर छोड़ दिया जाता था. द हेड क्रशर : The Head Crusher यह मध्यकाल में स्पेन में प्रयोग होने वाली आम तकनीक थी. तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक सजा वाले व्यक्ति के लिए बनाया गया है. पीड़ित का सिर इस टोपी से जकड़ दिया जाता था. इसके बाद एक व्यक्ति धीरे-धीरे लिवर को घुमाने लगता था. जैसे ही पैसे लिवर घूमता टोपी से लगे रोड पास आते जाते फिर एक झटके में पीड़िता से आवाज के साथ पर जाता था. द नी स्प्लिटर : The Knee Splitter यह हथियार भी स्पेन में ही काम लिया जाता था. यह हथियार को देखते ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना खतरनाक होगा. इसे द नी स्प्लिटर कहते हैं. इसमें पैरों के घुटनों को फसाकर इसे दबाया जाता था जिस से कि उसके घुटनो की हड्डियां टूट जाती थी. इस हथियार के प्रयोग से किसी की जान तो नहीं जाती थी परंतु उस इंसान के घुटने किसी काम के नहीं रहते थे. कभी कभी इस हथियार का उपयोग घुटनो के अलावा केहुनियों पर भी किया जाता था.

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