अमर हो जाता शाहजहां लेकिन औरंगजेब ने नहीं बनने दिया काला ताजमहल

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आगरा का ताज महल दुनिया में आज भले ही मशहूर है. जिसकी कहानी तो हर कोई जनता है. पर आपने काले ताज की कहानी ना ही सुनी होगी न ही देखीं होगी. मगर भारत में एक काला ताज महल भी था. जो ठीक मौजूदा ताजमहल के सामने बनने वाला था. जिसके निर्माण का जिक्र शाहजहाँ ने अपने वसीयत में की थी. यदि शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने चालाकी न की होती तो आज दुनिया सफेद ताज महल के सामने काले ताजमहल का दीदार करती.

मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के वसियत के मुताबिक काले संगमर्मर पत्थरों का एक काल्पनिक मकबरा जिसे काले ताजमहल के नाम से जाना जाता है. जिसके बारे में कहा जाता है कि यह उत्तर प्रदेश के यमुना नदी की दूसरी तरफ मौजूदा ताज महल के ठीक सामने बनाया जाना था. जिसका जिक्र शाहजहाँ ने अपनी तीसरी बीवी मुमताज़ महल से अपने लिए की थी.

ताज महल या ममी महल पुस्तक के मुताबिक शाहजहां ने वसीयत की थी कि उसे ताज के ठीक पीछे मेहताब बाग में दफन किया जाए. वसियत और शाही रिवाज के मुताबिक औरंगजेब को ताज के पीछे एक और ब़डी इमारत का निर्माण करवाना था और ये कोशिश भी करनी थी कि उसके वालिद का मकबरा उसकी मां से किसी तरह कम न रहे. औरंगजेब के लिए यह एक मुश्किल की घड़ी थी. औरंगजेब वसियत के मुताबिक कुछ भी नहीं करना चाहता था. दुश्मनों के हमले में लगातार ल़डाई से शाही खजाना खाली हो गया था. उसने वसियत की शर्तों से बचने के लिए बड़ी चतुराई से एक रास्ता निकाल लिया.
औरंगजेब मकबरे बनाने को फिजूल खर्ची मानता था. धर्म संकट में फसे औरंगज़ेब ने इस मामले में इस्लामिक कायदों का हवाला देते हुए शाही उलेमाओं से राय ली; कि क्या अगर बाप ऎसी कोई वसीयत करे जो इस्लाम की रोशनी में सही न हो तो क्या उसे मानना चाहिए ? राय देते हुए उलेमाओं ने वसीयत को गलत बताया जिसमे औरंगज़ेब ने अपने तर्क के मुताबिक़ उसके बाप को उसकी मां यानि मुमताज महल से कमाल दर्जे की मुहब्बत थी कह शाहजहाँ का मक़बरा मुमताज़ के मकबरे के नज़दीक बना डाला जिसके वजह से काले ताज महल का निर्माण सिर्फ कल्पना में ही रह गया.

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