Kal Bhairav Temple: भगवान को क्यों चढ़ाई जाती है शराब

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फूल-माला, मेवा-मिठाई जैसे चढ़ावे सभी देवी-देवताओं को चढ़ाये जाते है. मगर क्या आप जानते है एक मंदिर ऐसा भी है जहां देशी शराब चढ़ाया ही नहीं बल्कि मंदिर में स्थापित देवता की प्रतिमा को पिलाया भी जाता है. अन्धविश्वास और आस्था के इस रहस्य से आज भी पर्दा नहीं उठ पाया. जिस किसी ने कोशिश भी की उसके हाथ कुछ नहीं लग पाया. तो चलिए जानते है इस चमत्कारी मंदिर के बारे में.

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है काल भैरव का मंदिर. जहां सदियों से मंदिर के प्रतिमा को यानी काल भैरव बाबा को शराब पीलाने का सिलसिला चला आ रहा है. यह कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, यह कोई नहीं जानता. काल भैरव का यह मंदिर लगभग छह हजार साल पुराना माना जाता है. यह एक वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर है. वाम मार्ग के मंदिरों में मांस, मदिरा, बलि, मुद्रा जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं. प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिकों को ही आने की अनुमति थी. वे ही यहां तांत्रिक क्रियाएं करते थे और कुछ विशेष अवसरों पर काल भैरव को मदिरा का भोग भी चढ़ाया जाता था. कालान्तर में ये मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया गया, लेकिन बाबा ने भोग स्वीकारना यूं ही जारी रखा.

यहां आने वाले लोगों और पंडितों का कहना है कि वे बचपन से भैरव बाबा को भोग लगाते आ रहे हैं, जिसे वे खुशी-खुशी ग्रहण भी करते हैं.पहले यहां जानवरों की बलि चढ़ाने के बाद बलि के मांस के साथ-साथ भैरव बाबा को मदिरा भी चढ़ाई जाती थी. अब बलि तो बंद हो गई है, लेकिन मदिरा चढ़ाने का सिलसिला वैसे ही जारी है. इस मंदिर की महत्ता को प्रशासन की भी मंजूरी मिली हुई है. खास अवसरों पर प्रशासन की ओर से भी बाबा को मदिरा चढ़ाई जाती है. काल भैरव के मदिरापान के पीछे क्या राज है, इसे लेकर लंबी-चौड़ी बहस हो चुकी है.

पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा करने वाले पुजारियों के मुताबिक ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज अधिकारी ने मंदिर की बारीकी से जांच करवाई थी. लेकिन कुछ भी उसके हाथ नहीं लगा…! उसने प्रतिमा के आसपास की जगह की खुदाई भी करवाई, लेकिन नतीजा ये हुआ कि उसके बाद वे भी काल भैरव के भक्त बन गए. उनके बाद से ही यहां देसी मदिरा को वाइन उच्चारित किया जाने लगा, जो आज तक जारी है.

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