Wadiyar dynasty I एक श्राप 400 सालों से इस राजवंश का कर रहा है पीछा I नहीं पैदा होता वारिस

0
201

मैसूर राजवंश की एक कहानी है जिस पर यकीन करना मुश्किल है. ये कहानी है एक श्राप की. एक श्राप 400 सालों से वाडियार राजवंश का पीछा कर रहा है. 400 सालों से इस राजवंश का अगला राजा दत्तक पुत्र ही बन रहा है. यानी राजा-रानी को अपना वारिस चुनने के लिए किसी को गोद लेना पड़ता है, क्योंकि रानी ने कभी बेटों को जन्म नहीं दिया.

मैसूर पैलेस मैसूर राजवंश के उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है. भले ही ये महल 1912 में बनकर तैयार हुआ, लेकिन ये पैलेस वाडियार राजवंश के 600 सालों के इतिहास को बयां करता है. मैसूर राजघराने पर राज करने वाले वाडियार राजवंश का इतिहास शुरू होता है सन 1399 से. यानी मैसूर राजवंश भारत में अब तक सबसे ज्यादा लंबे वक्त तक राजशाही परंपरा को निभाने वाला वंश है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि पिछले 5 सदियों से इस राजवंश को चलाने वाले महारानी की कोख से जन्म नहीं लेते. सन् 1612 के बाद से इस राजवंश के राजा-रानी को कोई पुत्र पैदा नहीं हुआ. हर बार दत्तक पुत्र को ही राजा बनाया जाता है. मैसूर राजघराने के मौजूदा राजा यदुवीर वाडियार को भी गोद ही लिया गया है. महारानी प्रमोदा देवी ने अपने पति श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार की बड़ी बहन के बेटे यदुवीर को गोद लेकर उसे राजा घोषित किया. बताया जाता है कि पिछले चार सौ सालों से एक श्राप इस राजघराने का पीछा कर रहा है. मैसूर राजघराने को लेकर मान्यता है कि 1612 में दक्षिण के सबसे शक्तिशाली विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर विजयनगर की अकूत धन संपत्ति लूटी गई थी. उस समय विजयनगर की तत्कालीन महारानी अलमेलम्मा हार के बाद एकांतवास में थीं. लेकिन उनके पास काफी सोने, चांदी और हीरे- जवाहरात थे. वाडियार ने महारानी के पास दूत भेजा कि उनके गहने अब वाडियार साम्राज्य की शाही संपत्ति का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें दे दें. लेकिन अलमेलम्मा ने गहने देने से इनकार कर दिया. इसके बाद शाही फौज ने ज़बरदस्ती ख़ज़ाने पर कब्जा करने की कोशिश की. इससे दुखी होकर महारानी अलमेलम्मा ने श्राप दिया कि जिस तरह तुम लोगों ने मेरा घर ऊजाड़ा है उसी तरह तुम्हारा देश वीरान हो जाए. इस वंश के राजा- रानी की गोद हमेशा सूनी रहे. इसके बाद अलमेलम्मा ने कावेरी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. राजा को जब ये पता चला तो वो काफी दुखी हुए. वो अलमेलम्मा की मौत नहीं चाहते थे, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था. तब से अब तक लगभग 400 सालों से वाडियार राजवंश में किसी भी राजा को संतान के तौर पर पुत्र नहीं हुआ. राज परंपरा आगे बढ़ाने के लिए राजा-रानी 400 सालों से परिवार के किसी दूसरे सदस्य के पुत्र को गोद लेते आए हैं. वैसे तो देश में राजशाही परंपरा खत्म हो चुकी है, लेकिन अभी भी राजवंशों में उसी परंपरा का पालन किया जाता है, जो सदियों से चली आ रही है. इसी परंपरा के तहत पहले यदुवीर को गोद लिया गया, और फिर परंपरा के मुताबिक एक राजपरिवार में उनकी शादी की गई. एक अनुमान के मुताबिक मैसूर राजपरिवार के पास 10 हजार करोड़ की संपत्ति है. भले ही राजशाही खत्म हो गई है, लेकिन इस महल को देखकर आप रजवाड़ों के वैभव का अंदाजा लगा सकते हैं. राजा का शासन खत्म हो गया है, लेकिन अब भी खास मौकों पर यहां राजा का दरबार सजता है. राजा सिंहासन पर आसीन होता है और प्रजा उनके सामने बैठती है. दशहरे के मौके पर मैसूर के लोग राजा को सम्मान देने के लिए जुलूस निकालते हैं. राजा के आदेश के बाद ही दशहरे का कार्यक्रम शुरू होता है. मैसूर में जितना महत्व राजपरिवार का है, उतना ही मैसूर महल का भी है. राज परिवार अब इस महल के एक हिस्से में ही रहता है. बाकी सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. हालांकि यदुवीर की शादी के लिए अंबा विलास पैलेस में गुरुवार से ही लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई है. अब आम लोगों की नजर इस शाही शादी के रिशेप्सन पर लगी है, जिसमें कई राजनेताओं और बॉलीवुड हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है. रिसेप्शन में दो हजार से ज्यादा गेस्ट शामिल हो सकते हैं, जिसमें फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के भी सेलिब्रिटी शामिल होंगे. इसके बाद 2 जुलाई को बेंगलुरु पैलेस में एक और रिसेप्शन रखा गया है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here