Attila the Hun : पूरे यूरोप को बनाया बंदी,सुहागरात में निकल गयी जान

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‘अत्तिला हूण’ के बारे में कहा जाता है कि यह एक ऐसा राजा था, जिसने एशिया से लेकर यूरोपियन देशों तक हूण साम्राज्य का परचम लहराया. उसने हूण साम्राज्य को विश्व विजेताओं की क़तार में लाकर खड़ा कर दिया था.
‘अत्तिला’ का जन्म 405-06 ई. में डेन्यूब नदी से उत्तर की ओर हूणों के एक शक्तिशाली परिवार में हुआ था. अत्तिला का पिता मुंदजुक तत्कालीन सम्राट ऑक्टर और रुगा का भाई था. अत्तिला और उसके बड़े भाई ब्लेदा की परवरिश अन्य हूणों की तरह नहीं हुई. इसे तीरंदाज़ी के साथ-साथ युद्ध के सारे कौशल सिखाये गये.जल्दी ही उसने खुद को पूरी तरह तैयार किया और हूणों का शासक बना. वह अपने समय का कितना बड़ा क्रूर शासक था. इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि उसे ‘भगवान का कोड़ा‘ तक कहा गया.


433 ई. में अत्तिला ने ब्लेदा के साथ मिलकर हूण साम्राज्य की बागडोर संभाली. पावर में आते ही उसने अपनी ताक़त को इकट्ठा करना शुरु कर दिया. वह हूण सम्राज्य का विस्तार चाहता था. उसकी नज़र अपने पड़ोसी राज्यों पर थी. वह पश्चिमी और पूर्वी रोमन साम्राज्य को सबसे पहले जीतना चाहता था. मौका पाकर उसने इन पर लगातार आक्रमण शुरू कर दिए.

कुछ ही समय में अत्तिला ने रोमन सम्राज्य की जड़ें हिला कर रख दीं. अत्तिला से रोम साम्राज्य इस तरह भयभीत हुआ कि उसने अत्तिला को शांति बनाए रखने के बदले 700 पौंड मूल्य का सोना वार्षिक कर के रूप में देना शुरू कर दिया. रोम द्वारा की गयी यह संधि अत्तिला की मृत्यु तक कायम रही.445 ई. में ब्लेदा की मृत्यु हो गयी और अत्तिला हूण सम्राज्य का अकेला शासक बन गया. अत्तिला की ताकत अब पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी. वह उस समय का सबसे शक्तिशाली सैन्य कमांडर माना जाने लगा.

450 ई. के पश्चात्‌ अत्तिला पूर्वी साम्राज्य को छोड़ पश्चिमी साम्राज्य की ओर बढ़ा. पश्चिमी साम्राज्य का सम्राट तब वालेंतीनियन तृतीय था. सम्राट की बहन जुस्ताग्राता होनोरिया ने अपने भाई के विरुद्ध जाकर अत्तिला को अंगूठी उपहार स्वरुप भेजी. इसको अत्तिला द्वारा शादी का प्रस्ताव समझा गया. उसने इस पर अपनी सहमति जताई, किन्तु दहेज़ के रुप में उसका आधा राज्य मांग लिया.पश्चिमी साम्राज्य का आधा राज्य दहेज के रुप में अत्तिला को महंगा पड़ा. इस कारण उसे युद्ध का सामना करना पड़ा. अपने पहले मोर्च पर तो वह सफल रहा था. वह मेत्स को लूटते हुए ल्वार नदी के तट पर बसे और्लियां तक पहुंचने में सफल रहा, किन्तु इसके आगे नहीं बढ़ सका.

दो महीने बाद 451 ई. के आसपास उसने एक बार फिर से पश्चिमी साम्राज्य पर हमला कर दिया. इस वार ने उसकी मुसीबत बढ़ा दी. दोनों सेनाएं सेन नदी के तट पर ट्रॉय के निकट मिली और शुरु हो गया एक खूनी संघर्ष.इस भीषण युद्ध को जीतने के लिए अत्तिला ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी,  मगर उसे हार का मुंह देखना पड़ा. कहा जाता है कि यह उसके जीवन की एकमात्र हार थी.
इस हार को अत्तिला पचा नहीं पा रहा था. वह शांत बैठने वाला नहीं था. उसने अपनी सेना को और ज्यादा मजबूत किया और इटली पर धावा बोल दिया. अंत में सम्राट वालेंतीनियन को भागने पर मजबूर होना पड़ा. इस युद्ध के बाद अत्तिला आतंक का पर्याय बन गया. यूरोपियन लोग उसके नाम से थर-थर कांपने लगे.

मत्यु जीवन का कड़वा सच है. इससे अत्तिला भी नहीं झुठला सका. किन्तु उसकी मौत इस तरह होगी यह किसी ने भी नहीं सोचा होगा. 453 ई. का समय रहा होगा. अत्तिला पूर्वी रोमन पर हमला करने की योजना बना चुका था, लेकिन इससे पहले उसके शादी का विचार आ गया. इसके तहत उसने ‘इल्डीको’ नामक एक सुन्दर औरत से शादी कर ली.शादी वाली रात वह अपनी पत्नी के साथ था. इसी दौरान अचानक उसका रक्तचाप बढ़ गया और उसके दिमाग की नस फट गई। उसको उपचार दिया जाता, इससे पहले उसने अपना दम तोड़ दिया. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अत्तिला ऐसे-कैसे मर सकता है. उसकी मौत एक रहस्य से कम नहीं थी.
उसके शरीर को सोने-चांदी से बने ताबूत में कैद कर दफना दिया गया. जिन नौकरों ने उसके शव को दफ़नाया था, उन्हें मार दिया गया. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि हूण नहीं चाहते थे कि किसी को पता चले कि अत्तिला का शरीर कहां दफ़न है.हुआ भी ऐसा ही अत्तिला कहां दफन है, वह उसकी लाश के साथ ही दफन हो गया.

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