परमाणु हमले से भी बेअसर थे गद्दाफी के सेक्स बंकर्स

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जितना बेरहम, उतना ही अय्याश. जितना दिलकश, उतना ही सनकी. जितना फौजी, उतना ही डरपोक. लिबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की यही पहचान थी.खून बहाने से कभी भी ना हिचकने वाले गद्दाफी को ऊंचाइयों से डर लगता था. पानी के ऊपर से उड़ान भरने से वो बचता था और कभी होटल में रहना पड़ा तो ग्राउंड फ्लोर पर ही रहना पसंद करता था.निहत्थे प्रदर्शनकारियों और दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए भाड़े के गुंडों को साथ रखना गद्दाफी का पुराना शगल था. महज 27 साल की उम्र में गद्दाफी ने रक्तहीन क्रांति करके पश्चिम समर्थक किंग इदरिस का तख्तापलट किया था. एक किसान परिवार में जन्मे गद्दाफी पर सत्ता का नशा ऐसा चढ़ा कि अपने लिए उसने पहाड़ियों के बीच एक ऐसा बंकर बनवाया, जिस पर परमाणु बमों का भी असर ना हो. और आलीशान इतना कि दुनिया के सारी सुविधाएं हासिल हो सकें, लेकिन जनता का पारा चढ़ा तो उस बंकरनुमा महल को भी लूट लिया.

जब लीबिया की राजधानी पर विद्रोहियों का कब्ज़ा हुआ है तब से लेकर अब तक गद्दाफी के कई बंकर मिल चुके हैं, लेकिन एक बंकर सबसे बड़ा औऱ सबसे अलग है, जिसे गद्दाफी अपनी अय्याशी के लिए इस्तेमाल करता था.सच्चाई यही है कि गद्दाफी को तानाशाह बनाने का जिम्मेदार कोई और नहीं, उसके अपने बीवी-बच्चे और उसकी नाजाय़ज़ ख्वाहिशें रही. गद्दाफी के बीवी-बच्चों की दौलत की भूख और जुल्मों ने ही आम लोगों को उसे गोली मारने पर मजबूर कर दिया.लीबिया के राजा इद्रिस से जब जनता का मोहभंग हुआ तो उसकी आवाज बनकर उभरा था 28 साल का गद्दाफी. उस भरी तरुणाई में भी लोगों ने अपनी तकदीर गद्दाफी के हाथों में सौंप दी थी. गद्दाफी की निरंकुश तानाशाही और उसके बीवी-बच्चों की लूट-खसोट उसके निर्मम अंत का कारण बना.अपने बेलगाम बेटों के भ्रष्टाचार के जरिए गद्दाफी एंड फैमिली ने लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति लूटी. बताया जाता है कि गद्दाफी के पास करीब 7 बिलियन डॉलर यानी 350 अरब रुपये का तो सिर्फ सोना ही था.

दुनिया के अलग-अलग देशों में गद्दाफी की संपत्ति 168 अरब डॉलर यानी 8400 अरब रुपये आंकी गयी है. और इसी दौलत से एक तरफ गद्दाफी और उसके बेटे-बेटियों की अय्य़ाशियां बढ़ती गयी और दूसरी तरफ लोगों का आक्रोश. इसी आक्रोश की आग में भस्म हो गयी गद्दाफी की तानाशाही.जिस परिवार के ऐशो-आराम के लिए गद्दाफ़ी ने लीबिया को लूटा, वो परिवार उसके जीते-जी तहस-नहस हो गया और आखिरी वक्त में गद्दाफी को बचाने वाला कोई नहीं था.

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