जब हीराबाई की जुल्फों में गिरफ्तार हुआ औरंगजेब

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मुग़ल बादशाह औरंगजेब को एक कठोर,धर्मांध और सत्ता के लालची शासक के रूप में जाना जाता है. शायद इसकी वजह मुगलों का सत्ता के लिए मारकाट वाली विरासत भी जिम्मेदार है जहाँ बगैर खून बहाए तख़्त नसीब नहीं होता था. औरंगजेब की शख्सियत में मुगलों के इस चरित्र का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा जाता है. बहरहाल शासक के रूप में औरंगजेब जो भी हो लेकिन जवानी में उसके दिल में भी मुहब्बत की उमंगें उठा करती थी जिसे वो राजसत्ता की भूख के लिए अक्सर दबा दिया करता था .लेकिन एक बार उसकी ये उमंग इतनी बेकाबू हो गयी कि अपने सामने हीराबाई की बेपनाह हुश्न को देख वो गश खाकर गिर पडा


.सन 1636 में जब औरंगजेब दक्कन का गवर्नर बन कर बुरहानपुर पहुंचा, तो उसकी मुलाकात हीराबाई से हुई़  बेपनाह रूप-सौंदर्य और अदा के अलावा वह संगीत की गहरी समझ के लिए भी जानी जाती थी़  बादशाह शाहजहां के साढ़ू भाई और खानदेश के तब हाकिम रहे सैफ खान के महल में जब औरंगजेब ने हीराबाई को पहली बार देखा, तो गश खाकर गिर गया़  जब वह होश में आया, तो उसका सिर हीराबाई की गोद में था, जिसके जुल्फों में वह अब तक गिरफ्तार हो चुका था़

औरंगजेब हीराबाई के हुस्न का जितना कद्रदान था, उससे ज्यादा वह उसकी संगीत की गहरी समझ और उसे स्वर में हूबहू उतार देने की काबिलियत पर फिदा था. हीराबाई उस समय की संगीत से संबंधित लगभग सारी पुस्तकें पढ़ चुकी थी. औरंगजेब और हीराबाई की प्रेम कहानी का जिक्र तत्कालीन पुस्तकों में किया गया है़ इनमें सन् 1640 में हमीदुद्दीन खान नीमचा की लिखी औरंगजेब की जीवनी ‘एहकाम ए औरंगजेब’ के अलावा, 18वीं सदी में नवाज शम्स उद दौला शाह नवाज खान और उनके बेटे की लिखी किताब ‘मआसिर अल उमरा’ और 17वीं सदी में भारत की यात्रा करनेवाले इतालवी यात्री निकोलाओ मन्यूसी भी शामिल हैं.

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