नवाब हामिद अली खां बहादुर:ये नवाब टायलेट में लगाता था दरबार

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नवाबों के शौक और सनक के क्या कहने ,भारतीय इतिहास के कई राजा अपने अजीबो-गरीब शौक और सनक के लिए काफी मशहूर रहे हैं. कोई कुत्तों का शौकिन था, तो कोई आदमियों का! भारत में एक नवाब ऐसा भी हुआ जिसे अपने संडास में दरबार लगाने की अजीब सनक सवार थी। ये नावाब थे रामपुर रियासत के नवाब हामिद अली खां बहादुर .

आम चलन के मुताबिक़ रियासत के कामकाज और मंत्रियों की बैठक महलों के आलीशान दरबार में हुआ करते थे। महाराजा या फिर नवाब ऊंचे सिंहासन पर विराजमान होकर नीचे बैठे मंत्रियों से राजकाज के संबंध में मंत्रणा करते थे। लेकिन रामपुर में रियासत के कामकाज पर चर्चा और मंत्रियों की बैठक (आज के दौर के हिसाब से कैबिनेट मीटिंग) किसी भव्य दरबार में नहीं बल्कि संडास (टॉयलेट) के पास हुआ करती थी। जहां नवाब किसी सिंहासन पर नहीं बल्कि टॉयलेट में बैठकर अपना और रियासत का काम साथ-साथ निपटाया करते थे।

उत्तर प्रदेश स्थित रामपुर के तत्कालीन नवाब हामिद अली खां बहादुर के काम करने का तरीका कुछ ऐसा ही था। रियासत के कुछ जरूरी काम डेली बेसिस पर रोज निपटाने होते थे, लिहाजा हामिद अली खां बहादुर वक्त ज़ाया न करते हुए टॉयलेट में ही बैठे-बैठे रियासत के कई काम निपटा दिया करते थे। नवाब साहब का डेली रूटीन था, कि वो सुबह 2 घंटे और शाम को 2 घंटे टॉयलेट में बैठकर कैबिनेट को ब्रीफ किया करते थे।

नवाब के ये टॉयलेट भी कोई साधारण टॉयलेट नहीं थे। इसे रियासत के चीफ इंजीनियर ने बकायदा बैठक के हिसाब से ही तैयार किया था। इसे एक ऊंचे चबूतरे पर इस तरह डिजाइन किया गया था, जहां से नवाब साहब सभी को देख सके और नवाब साहब किसी को नजर न आए। यहां नवाब साहब बड़े आराम से हाज़त रफ़ा (शौच) किया करते थे और और हर काम में अपना निर्णय सुनाया करते थे।

हफ्ते में दो दिन नवाब हामीद अली खां बहादुर ऐसी कैबिनेट मीटिंग बुलाया करते थे।हामिद अली खान ने 1889 से 1930 तक इस रियासत पर शासन किया। नवाब की सनक ऐसी थी कि वो भारत में दफ़न नहीं होना चाहते थे इसलिए उनकी वसीयत के मुताबिक उन्हें ईराक स्थित कर्बला में दफनाया गया।

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