मूमल, महेंद्र और सौ कोस का सफर

राजकुमारी के साथ रात गुजारने के लिए कोसों दूर आता था राजकुमार, फिर ऐसे हो गया  पागल 

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राजस्थान की माटी प्रेम, साहस और संस्कृति की गौरवशाली कहानियां अपने अंदर समेटे हुए है। ऐसी ही एक कहानी है अद्वितीय सौन्दर्य की स्वामिनी मूमल और अदम्य साहस के प्रतीक महिन्द्रा के अटूट प्रेम की। हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी दोनों की प्रेम कहानियां यहाँ मशहूर है।

कहानी कुछ यूँ है कि एक दिन अमरकोट(सिंध) का राजकुमार महेन्द्रा शिकार की खोज में भटकता हुआ जैसलमेर की प्राचीन राजधानी लुद्रवा पहुंच गया। महेंद्रा यहां थोड़ी देर के लिए आराम करने के लिए एक बग़ीचे में बैठ गया। राजकुमार को बगीचे में देख मूमल अपनी दासी को उसकी सेवा करने भेजा। दासी के मुंह से मूमल की सुंदरता की चर्चा सुन महेन्द्रा के मन में मूमल को देखने की इच्छा जागी।बताते हैं कि कई बाधाओं को पार करते हुए महेन्द्रा आखिरकार मूमल से मिलने पहुंच गया। मूमल को साक्षात अपने सामने देख महेंद्रा बोला कि न किसी मंदिर में ऐसी मूर्ति होगी और न ही किसी राजा के महल में ऐसा रूप होगा। इस तरह दोनों आपस में निहारते हुए पहली नजर में एक-दूसरे को अपना दिल दे बैठे। महेन्द्रा रात को वहीं ठहरा और सुबह जल्दी फिर मिलने के वादे के साथ वहां से रवाना हो गया।

उसके बाद महेंद्रा मूमल को देखने के लिए सौ कोस का सफर रोज रात रेगिस्तान में ऊंट पर तय करते हुए अमरकोट से लुद्रवा पहुंचता। रातभर मूमल के पास ठहरने के बाद सुबह जल्दी वापस रवाना हो जाता। लेकिन एक दिन महेन्द्रा को आने में देर हो गई। देरी से पहुंचने पर उसने देखा कि एक पुरुष मूमल के साथ सो रहा है।इस कारण महेंद्रा का मूमल से मोह भंग हो गया और वह फिर कभी नहीं लौटने के लिए उलटे पांव वापस लौट पड़ा। बताते है कि उस दिन मूमल के साथ सेज पर पुरुष वेष में उसकी बहन सो रही थी। लेकिन इसे देख कर महेन्द्रा को अन्य पुरुष का भ्रम हो गया। इस घटना के बाद कई दिन तक महेन्द्रा का इंतजार करने के बाद विरह की वेदना में जल रही मूमल ने अपने एक गायक को अमरकोट भेजा।

गायक ने महेन्द्रा को मूमल का संदेश तो पहुंचा दिया लेकिन उसने पुरुष के साथ मूमल को देखने की बात बताई। जब गायक ने लौट कर यह किस्सा मूमल को बताया तो वह अमरकोट पहुँचकर उसने महेन्द्रा से मिलने का संदेश भेजा। लेकिन महेन्द्रा ने अपने प्यार की परीक्षा लेने के लिए मूमल के पास एक आदमी को भेजा। यह रोता हुआ यह आदमी मूमल के पास पहुंचा और कहने लगा कि रात को महेन्द्रा को काले नाग ने डस लिया। अब वे इस दुनिया में नहीं रहे।

नौकर के मुंह से महेंद्रा की मौत का सुनते ही मूमल धरती पर गिर पड़ी और महेन्द्रा के वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। इधर महेन्द्रा को जब यह समाचार मिला तो वह पागल हो गया। इसके बाद उसने शेष जीवन रेगिस्तान में मूमल-मूमल कहता फिरते गुजारी।बता दें कि राजस्थान में मूूमल की कलात्मक मेड़ी का बखान लोग लोक गीतों में भी आज भी गाते हैं।

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