कहां गायब हो गया जयगढ़ का रहस्यमय खज़ाना

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अकबर के भारत में वर्चस्व के दौर में कुछ प्रभावशाली मुस्लिम अधिकारी उसकी उदार धार्मिक नीतियों से खफ़ा होकर उसके खिलाफ साज़िश रचने लगे थे. अकबर को यह पता चला तो वह अपने वफ़ादार ‘मान सिंह’ के साथ सेना लेकर काबुल की और निकल पड़ा. बागियों  को मौत के घाट उतार कर अकबर ने मान सिंह को काबुल का गवर्नर बनाया. मान सिंह ने सालों वहां राज किया, वह शहर बसाया जिसे आज हम जयपुर के नाम से जानते हैं. माना जाता है कि मान सिंह ने राजा अकबर से छुप कर जयगढ़ के किले में कुएं खुदवाकर हीरे-जवाहरात और करोड़ों की संपत्ति रखी हुई थी.

सदियों बाद खज़ाने की लालच में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के समय जयगढ़ के किले की तलाशी और खुदाई करवाने का सोचा. इंदिरा के इरादे सामने आते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने उस रहस्यमयी खज़ाने पर पाकिस्तान का भी हिस्सा होने का दावा किया. भारत सरकार को लिखे पत्र में पाकिस्तान ने कहा कि विभाजन से पहले की हर संपत्ति में पाकिस्तान का हक है, इसलिए जयगढ़ में अगर कोई ख़ज़ाना है तो उसका एक हिस्सा पाकिस्तान को भी मिले. इंदिरा गांधी की ओर से काफी समय तक पाकिस्तान को कोई जवाब नहीं भेजा गया. भारत सरकार कहती है कि कोई ख़ज़ाना मिला ही नहीं. लेकिन फिर कुछ दिनों बाद दिल्ली-जयपुर हाई-वे को 3 दिनों के लिए बंद करवा दिया जाता है ताकि सेना वहां से आसानी से निकल पाए. उस क़िले में कुछ था या नहीं, इस रहस्य पर से पर्दा आज तक नहीं उठ पाया है.

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