Nero:Infamous Roman Emperor:जल रहा था रोम और नीरो बजा रहा था बांसुरी

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नीरो’ यह नाम जुबान पर आते ही जहन में एक तानाशाही राजा की छवि बन जाती है। इतिहास के पन्नों में दर्ज नीरों की क्रूरता का उदाहरण इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब रोम का एक नगर जल रहा था तो वह बांसूरी बजाते हुए अपने महल से आग की लपटों को देख रहा था। कैसे बना वह सबसे असवेंदनशील और क्रूर सम्राट?

नीरो रोम का सम्राट था। जिसने सन 0054 से लेकर 0068 तक रोमन सत्ता पर राज किया। जूलियो-क्लौडियन राजवंश के अंतिम सम्राट नीरो ने क्रूरता, अत्याचारी, अप्रभावी और तानाशाही राजा के रूप में अपनी पहचान बनाई। नीरो के पिता गनीस डोमेटिस अहेनबरबस और मां का नाम अग्रिप्पिन द यंगर था। शुरुआती दिनों में ही नीरो ने अपने पिता को खो दिया। अपने पति की मौत के कुछ दिनों बाद ही नीरो की मां ने अपने चाचा यानी तत्कालीन राजा क्लौडियस से शादी कर ली। नीरो की मां ने उसे अपनाने और सिंहासन का वारिस घोषित करने के लिए राजा क्लौडियस को राजी कर लिया। इतिहासकारों की माने तो अपने बेटे को सिंहासन का सुख देने के लिए उसकी मां ने सन 0054 में अपने पति क्लौडियस की हत्या करवा दी थी। क्लौडियस की मौत के बाद महज 17 साल की उम्र में ही नीरो रोम का सम्राट बन गया। वह रोम की गद्दी पर बैठने वाला सबसे छोटा शासक था।

नीरो के राजा बनने के शुरुआती दिनों में रोम पर उसकी मां अग्रिप्पिन द यंगर का जबरदस्त प्रभाव था, लेकिन समय के साथ नीरो की शक्ति बढ़ती गई और वह धीरे-धीरे इतना क्रूर, अत्याचारी और तानाशाही हो गया कि उसने अपनी ही मां की हत्या कर दी। नीरो के शासनकाल में रोम में काफी उथल-पुथल का दौर रहा।नीरो की क्रूरताओं के किस्से यहीं नहीं रुके। मतभेद के चलते उसने अपनी पहली पत्नी ऑक्टेविया को भी नहीं बख्शा। दूसरी पत्नी को भी उसने मौत के घाट उतार दिया। बाद में उसने रोम की एक शादीशुदा महिला से संबंध बनाने चाहे। इसके लिए उसने पहले उस महिला के पति की हत्या और विरोध करने पर नीरो ने उस महिला को भी मौत दिया।नीरो के अत्याचार से रोम की प्रजा पहले से ही त्रस्त थी लेकिन उसकी क्रूरता और असंवेदनशीलता की हद तब पार हो गई जब रोम का एक नगर जल रहा था लेकिन नीरो बांसूरी बजाते हुए अपने महल से आग की ऊंची लपटों का भयावह दृश्य देख रहा था।

जानकारों की माने तो नगर में लगी इस आग के पीछे खुद नीरो का ही हाथ था। इस बात से रोम का सीनेट इतना आक्रोषित हो गया कि उसने नीरो को दुश्मन घोषित कर दिया। एक किंवदंती यह भी है कि नीरो की क्रूरता के खिलाफ जनता के आक्रोश और विद्रोह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौज के साथ रोम पर हमला बोला तो उसमें खुद नीरो के अंगरक्षक शामिल हो गए। इसके चलते नीरो को पलायन करना पड़ा। विद्रोह के दौरान ही रोमन सीनेट ने भी उसे फांसी पर चढ़ाने के आदेश जारी कर दिए लेकिन गिरफ्तारी और फांसी के डर से बचने के लिए नीरो ने आत्महत्या कर ली।

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