सत्ता के मुगल वारिस की रवायत ये थी कि सभी भाइयों को इसमें हिस्सेदारी मिलती थी। ये रिवाज बाबर ने चलाया था और शाहजहां तक इसका पालन भी किया गया। लेकिन औरंगज़ेब ने इस परम्परा को नहीं माना और खुद को शाहजहां को वारिस घोषित कर दिया जबकि शाहजहां अपने बड़े बेटे द्वारा शिकोह को अपनी सल्तनत सौंपना चाहता था.  औरंगज़ेब का मानना था कि मुग़ल सल्तनत के सबसे योग्य वारिस वो हैं.सत्ता संघर्ष में जो लड़ाई हुई उसमें औरंगजेब जीता लेकिन उसने हारे हुए अपने भाई द्वारा शिकोह को इतनी भयानक मौत दी कि आज भी सुनकर लोगों के रौंगटे खड़े हो जाएं. 

औरंगज़ेब और द्वारा शिकोह में बचपन से ही रंजिश थी। दारा शिकोह की शादी के बाद शाहजहाँ ने दो हाथियों सुधाकर और सूरत सुंदर के बीच एक मुकाबला करवाया. ये मुगलों के मनोरंजन का पसंदीदा साधन हुआ करता था. अचानक सुधाकर घोड़े पर सवार औरंगज़ेब की तरफ़ अत्यंत क्रोध में दौड़ा. औरंगज़ेब ने सुधाकर के माथे पर भाले से वार किया जिससे वो और क्रोधित हो गया.उसने घोड़े को इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि औरंगज़ेब ज़मीन पर आ गिरे. उस समय दारा शिकोह भी वहां मौजूद था लेकिन उसने  औरंगज़ेब को बचाने की कोशिश नहीं की। इस घटना से औरंगजेब को काफी गहरा धक्का लगा। 

बीमार शाहजहां ने जब दारा शिकोह को अपना वारिस बनाया तो औरंगजेब ने बगावत कर दी।  1658 में औरंगज़ेब और उनके छोटे भाई मुराद ने आगरा के किले का घेरा डाल दिया. तब उनके पिता शाहजहाँ किले के अंदर ही थे. उन्होंने किले की पानी की सप्लाई रोक दी. कुछ ही दिनों में शाहजहाँ ने किले का दरवाज़ा खोल कर अपने ख़ज़ाने, हथियारों और अपने आप को अपने दोनों बेटों के हवाले कर दिया. अपनी बेटी को मध्यस्थ बनाते हुए शाहजहाँ ने अपने साम्राज्य को पाँच भागों में विभाजित करने की आखिरी पेशकश की जिसे चार भाइयों और औरंगज़ेब के सबसे बड़े बेटे मोहम्मद सुल्तान के बीच बांटा जा सके लेकिन औरंगज़ेब ने उसे स्वीकार नहीं किया.1659 में दारा शिकोह को उसके एक विश्वस्त साथी मलिक जीवन ने पकड़वा कर दिल्ली भिजवाया तो औरंगज़ेब ने उन्हें और 14 साल के बेटे सिफ़िर शुकोह को सितंबर की उमस भरी गर्मी में चीथड़ों में लिपटा कर खुजली की बीमारी से ग्रस्त हाथी पर बैठाकर दिल्ली की सड़कों पर घुमवाया.

उनके पीछे नंगी तलवार लिए एक सिपाही चल रहा था, ताकि अगर वो भागने का प्रयास करें तो उनका सिर धड़ से अलग कर दिया जाए.”दारा की मौत के दिन औरंगज़ेब ने उनसे पूछा था कि अगर उनकी भूमिकाएं बदल जाएं तो तुम क्या करोगे ? दारा ने उपहासपूर्वक जवाब दिया था कि वो औरंगज़ेब के शरीर को चार हिस्सों में कटवा कर दिल्ली के चार मुख्य द्वारों पर लटकवा देंगे.” सुनते ही आगबबूला औरंगज़ेब ने सैनिकों को आदेश दिया और दारा का सर धड़ से अलग कर दिया गया.

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