ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को काफी शर्मनाक मौत दी जिया उल हक़ ने

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1971 में भारत के हाथों मिली हार के बाद पाकिस्तानी जनरल जिया उल हक़ ने प्रधानमंती ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो  का तख्ता पलट दिया और उन्हें कैद कर लिया .आखिरकार 4 अप्रैल, 1979 को  भुट्टो को रात दो बजे, रावलपिंडी की सेंट्रल जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया.लेकिन फांसी देने से पहले देश के एक निर्वाचित प्रधानमंत्री को इतनी यातनाएं दी गयी जो किसी भी देश के सभ्य समाज के मुंह पर एक ऐसी कालिख है जिसे इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा। आइये जानते हैं भुट्टो के कैदी जीवन और फांसी पर चढ़ाये जाने से पहले उनके आख़िरी लम्हों के बारे में 

भुट्टो को  रावलपिंडी जेल के ‘ज़नान ख़ाने’ में, जहाँ महिला कैदियों को रखा जाता है, एक सात गुणा दस फ़ीट की कोठरी में कैद किया गया था.उन्हें  एक पलंग, गद्दा, छोटी मेज़ और एक बुक शेल्फ़ दी गई थी. बगल की कोठरी को उनकी रसोई बनाई गई जहाँ एक कैदी उनके लिए खाना बनाता था.हर दस दिन पर वो कैदी बदल दिया जाता था ताकि उसे भुट्टो से लगाव न पैदा हो जाए. “शुरू के दिनों में भुट्टो जब टॉयलेट जाते थे, तब एक गार्ड वहाँ भी उनकी निगरानी करता था. भुट्टो को ये बात इतनी बुरी लगती थी कि उन्होंने करीब करीब खाना ही छोड़ दिया था ताकि उन्हें टॉयलेट न जाना पड़े. 

4 अप्रैल को रात दो बजे  जिया सरकार ने भुट्टो की फांसी का दिन मुकर्रर किया। पंजाब सरकार के जल्लाद तारा मसीह को भुट्टो को फांसी देने के लिए लाहौर से बुलाया गया था. उसका पूरा परिवार चार पुश्तों से रणजीत सिंह के ज़माने से, फांसी देने का ही काम करता आया था.आठ बज कर पांच मिनट पर भुट्टो ने अपने हेल्पर अब्दुर रहमान से कॉफ़ी लाने के लिए कहा. उन्होंने रहमान से कहा कि अगर मैंने तुम्हारे साथ कोई बदसलूकी की हो, तो इसके लिए मुझे माफ़ कर देना.सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अपील ठुकरा दिए जाने के बाद भुट्टो का  रेज़र इसलिए ले लिया गया था कि कहीं वो उससे अपनी आत्महत्या न कर लें.

फांसी से पहले भुट्टो ने कहा, ‘मुझे दाढ़ी बनाने की अनुमति दी जाए. मैं मौलवी की तरह इस दुनिया से नहीं जाना चाहता.”नौ बज कर 55 मिनट पर उन्होंने अपने दांतों में ब्रश किया, चेहरा धोया और बाल काढ़े. इसके बाद वो सोने चले गए. रात डेढ़ बजे भुट्टो को जगाया गया. वो ऑफ़ वाइट रंग का सलवार कुर्ता पहने हुए थे. जेल अधिकारियों ने ज़ोर नहीं दिया कि वो इसे बदलें..जब सुरक्षाकर्मियों ने उनके हाथ पीछे कर बाँधने की कोशिश की तो उन्होंने उसका विरोध किया,आख़िरकार उनके हाथों में ज़बरदस्ती रस्सी बाँधी गई. उसके बाद उन्हें एक स्ट्रेचर पर लिटा कर करीब 400 गज़ तक ले जाया गया.इसके बाद भुट्टो स्ट्रेचर से ख़ुद उतर गए और फाँसी के फंदे तक चल कर गए. जल्लाद ने उनके चेहरे को काले कपड़े से ढक दिया. उनके पैर बाँध दिए गए. जैसे ही दो बज कर चार मिनट पर मजिस्ट्रेट  ने इशारा किया, जल्लाद तारा मसीह ने लीवर खींचा.

भुट्टों के आख़िरी शब्द थे, ‘फ़िनिश इट.”थोड़ी देर बाद एक ख़ुफ़िया एजेंसी के एक फ़ोटोग्राफ़र ने आ कर भुट्टो के गुप्तांगों की तस्वीर ली. प्रशासन इस बात की पुष्टि करवाना चाहता था कि भुट्टो का इस्लामी रीति से ख़तना हुआ था या नहीं. तस्वीर खिंचने के बाद इस बात में कोई संदेह नहीं रहा कि भुट्टो का वास्तव में ख़तना हुआ था.” भुट्टो को मौत के बाद इस अपमान से भी गुज़रना पड़ा था.

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