kalinga war:इस युद्ध ने इतिहास के सबसे ‘चंड अशोक’ को बना दिया संन्यासी

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भारत के इतिहास में मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक को काफी सम्मानजनक स्थान प्राप्त है .दुनियाभर में उन्हें दो वजहों से जाना जाता है. पहला, कलिंग युद्ध के लिए और दूसरा, भारत और दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए. लेकिन जिस सम्राट का शान्ति का सन्देश फैलाने और बौद्ध धर्म के विस्तार में योगदान माना जाता है उनके बारे में ये भी एक तथ्य है उन जैसा निरंकुश,तानाशाह और कठोर शासक भारत के इतिहास में कम ही हुए .

अशोक एक गुस्सैल राजा थे. कहानियों के अनुसार वह अपने हरम में सैकड़ों औरतों को रखते थे और उनके साथ मनमानी करते थे. उन पर कईयों को ज़िंदा जलवाने तक का आरोप है. कहानियां तो यह भी कहती हैं कि उन्होंने गद्दारी के शक में अपने सैकड़ों मंत्रियों को मौत की सजा दे दी थी, बिलकुल तानाशाहों की तरह. उन्होंने एक यातना गृह भी बनवाया था, जहां वह अपने विरोधियों को कैद करके यातनाएं देते थे. वह यातना गृह इतने खराब होते थे कि इन्हें उस समय धरती का नरक कहा जाता था. लोगों का मानना है कि अशोक के इन्हीं अमानवीय कार्यों के कारण उन्हें ‘चंड अशोक’ की संज्ञा दी गई थी.

अपने शासन के नवें वर्ष तक अशोक ने मौर्य साम्राज्य साम्राज्य के विस्तारवादी नीतियों का ही अनुसरण किया .इसी क्रम में उन्होंने कलिंग पर आक्रमण किया जिसे अशोक की क्रूरता के लिए भी जाना जाता है. कलिंग, जो उस समय एक स्वतंत्र लोकतान्त्रिक राज्य था. अशोक ने इसको जीतने के लिए हमला कर दिया. जीत का भूत अशोक पर इतना ज्यादा था कि वह तेजी से आगे बढ़ते गए और लोगों को काटते गए. इस युद्ध में लगभग 100000 सैनिक मारे गए और 150000 से ज्यादा लोगों को बंदी बनाया गया. इस युद्ध को जीतने के बाद जब अशोक रणभूमि पहुंचे, तो वहां पड़े शवों और उन पर विलाप करते हुए परिजनों को देखकर उनका दिल पसीज गया. यहीं से उनके जीवन की दशा और दिशा बदल गई .

कलिंग के इस युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया. उन्होंने बौद्ध धर्म को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी फैलाया. इसके लिए उन्होंने बुद्ध के जीवन से जुड़ी जगहों पर कई स्तूपों का निर्माण किया. उन्होंने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को सिलोन भेजा. ताकि,वहां बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा सके. अशोक ने बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए हजारों स्तूप बनवाए. सांची का स्तूप इसका एक बड़ा उदाहरण है. सारनाथ में बना अशोक स्तंभ अशोक ने ही बनवाया था, जोकि एक बहुत ही लोकप्रिय स्तूप होने के साथ-साथ भारत का राष्ट्रीय चिह्न भी है.

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