ये थी इतिहास की सबसे छोटी जंग, 38 मिनट में हो गया था समर्पण

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लोगों के बीच जब भी युद्ध की चर्चा होती है तो लोग पहले और दूसरे विश्व युद्ध को याद करते हैं. पहला विश्व युद्ध साल 1914 से 1918 तक लड़ा गया था, वहीं दूसरा विश्व युद्ध साल 1939 से 1945 तक लड़ा गया था.लेकिन युद्ध के इतिहास में एक युद्ध ऐसा भी है जिसका फैसला केवल 38 मिनट में हो गया .इसे सबसे छोटे युद्ध के तौर पर याद किया जाता है. ये युद्ध साल 1896 में इंग्लैंड और जंजीबार (पूर्वी अफ्रीका) के बीच हुआ था. जिसमें इंग्लैंड ने जंजीबार को केवल 38 मिनट तक चले युद्ध के बाद समर्पण करने को मजबूर कर दिया था.

इस युद्ध की नींव उस समय पड़ी, जब जंजीबार को लेकर जर्मनी और ब्रिटेन के बीच साल 1890 में संधि पर हस्ताक्षर हुआ. ब्रिटेन की कोशिश थी कि इस संधि के जरिए वो पूरे पूर्वी अफ्रीका में अपने साम्राज्य का विस्तार कर सके. इसी कारण जंजीबार की सत्ता को ब्रिटेन को सौंपा गई, वहीं समझौते में जर्मनी के हिस्से में तंजानिया के भूभाग आए.

संधि के मुताबिक ब्रिटेन साम्राज्य ने जंजीबार पर अपने अधिकार की घोषणा करते हुए एक कठपुतली सुल्तान को सत्ता के संचालन के लिए बैठा दिया. साल 1893 में हमद बीन तुवानी, जो कि ब्रिटेन साम्रज्य के समर्थक थे, सत्ता उनके हाथों में सौंप दी गई. हमद ने पूरे तीन साल तक शांतिपूर्वक शासन किया. 25 अगस्त 1896 को हमद की अचानक महल में मौत हो गई. ऐसा कहा जाता है कि सत्ता के लालच में सुल्तान हमद के भतीजे खालीद बीन बर्गश ने जहर दे दिया. हमद के मरने के कुछ ही पल के बाद बिना ब्रिटेन की सहमति के खालिद ने खुद को जंजीबार का सुल्तान घोषित कर दिया. खालिद के इस फैसले से जंजीबार में तैनात ब्रिटेन के अधिकारी नाखुश हुए और वहां चीफ डिप्लोमैट बेसिल केव ने खालिद को तुरंत सुल्तान की गद्दी छोड़ने का आदेश दिया. खालिद ने अंग्रेजों के आदेश को दरकिनार करते हुए महल के चारों तरफ अपनी सेना को तैनात कर दी. तैनात सेना के पास लड़ने के लिए वही बंदूकें थीं, जिन्हें ब्रिटिश अधिकारियों ने सुल्तान हमद को भेंट की थी. खालिद के 3000 फौजी हथियारों के साथ महल को सुरक्षित बनाए हुए थे. ठीक उसी समय ब्रिटेन के दो जंगी समुद्री जहाज एचएसएस फिलोमॉल औऱ एचएसएस रश पर सवार ब्रिटिश सैनिक पहुंचे और उन्होंने तुरंत ब्रिटिश काउंसलेट को अपने कब्जे में ले लिया.

ब्रिटिश सरकार ने 26 अगस्त को सुल्तान खालिद को अंतिम अल्टिमेटम जारी किया कि वो अगले दिन सुबह 9 बजे तक शांतिपूर्वक आत्मसमर्पण कर दें. इसके अलावा केव ने ब्रिटेन के जंगी जहाजों को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश भी दे दिया. ब्रिटिश सैनिकों को ठीक 9 बजे हमले का ऑर्डर दिया. इसके बाद ब्रिटिश तोपों ने सुबह के ठीक 9:02 बजे हमल पर गरजना शुरू किया. ठीक 38 मिनट के भीतर सुल्तान खालिद की सेना परास्त हो चुकी थी. जिस समय सुल्तान की हार हुई, घड़ी में 9:40 मिनट हो रहा था. ये है युद्ध दुनिया का सबसे छोटा युद्ध.

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