omg:सदियों से हवा में झूल रहा है ये भगवान् शिव का मंदिर

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हिन्दुस्तान में एक ऐसा मंदिर है, जो हवा में झूल रहा है. इस मंदिर का आधार जिस खंभे पर टिका है, वो सदियों से जमीन को छुए बिना हवा में तैर रहा है. इसे जानने और सुनने के बाद लोग यही कहते हैं कि ये या तो कोई वहम है या फिर आंखों का धोखा है. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है.

ये मंदिर भगवान शिव की भक्ति में नृत्य कर रहा है और इसका एक पैर सदियों से नृत्य मुद्रा में झूल रहा है. नाचता हुआ यह लेपाक्षी मंदिर दिल्ली से करीब 2000 किलोमीटर दूर आन्ध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है. जिसकी दक्षिण भारत में बड़ी मान्यता है.

ये मंदिर करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है. जिसे विजयनगर के राजाओं ने बनवाया था. लेकिन जिस पर्वत पर ये मंदिर बना है. उस जगह का पहला ज़िक्र रामायण में मिलता है. कहते हैं कि जब रावण सीता का अपहरण करने के बाद श्रीलंका रवाना हुआ तो पक्षीराज जटायु ने इसी जगह पर रावण का रास्ता रोका था. ऐसा माना जाता है कि ये वही जगह है जहां पर रावण और जटायु के बीच भयंकर युद्ध हुआ था और उस युद्ध में रावण ने जटायु को बुरी तरह से घायल कर दिया था. ये सिर्फ एक कहानी नहीं है बल्कि इस मंदिर में मौजूद एक निशान को उस कहानी का गवाह बताया गया. पैरों के इस निशान को लेकर कई मान्यताएं हैं. कोई कहता है ये देवी दुर्गा का पैर है तो कोई इसे श्रीराम के निशान मानता है. लेकिन इस मंदिर का इतिहास जानने वाले इसे सीता का पैर मानते हैं.

ऐसा माना जाता है कि जटायु के घायल होने के बाद सीता ने जमीन पर आकर खुद अपने पैरों के ये निशान छोड़े थे और घायल जटायु को भरोसा दिलाया था कि जब तक भगवान राम यहां नहीं आते. यहां मौजूद पानी जटायु को जिंदगी देता रहेगा. ऐसा माना जाता है कि ये वही स्थान है जहां जटायु ने श्रीराम को रावण का पता बताया था.

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