इंदिरा गांधी ने भारत में इसलिए लगाईं थी इमरजेंसी

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सन 1971 का जब देश में लोकसभा चुनाव हुए . उस दौरान पूरे देश की निगाहें रायबरेली की उस सीट पर गड़ी थी जहां से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खड़ी थीं और उनके खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण थे। एक तरफ पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी और दूसरी तरफ एक और बड़ा वर्ग जो कि कांग्रेस के खिलाफ काफी मजबूत शक्ति के रूप में उभर रहा था।शुरुआत में ऐसा लगा कि राजनारायण चुनाव जीत चुके हैं. उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया .लेकिन बाद में  पता चला कि इस चुनाव में वो नहीं बल्कि जीत इंदिरा गांधी की हुई है.  चुनाव के इस नतीजे से नाखुश राजनारायण ने इस नतीजे को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दे दी। राजनारायण ने इंदिरा गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होनें सरकार के संसाधनों और मशीनरी का इस चुनाव में खुलकर दुरूपयोग किया है।

जस्टिस  जगमोहन लाल सिन्हा ने दोनों पक्षों की दलील को सुना था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आखिरकार जस्टिस सिन्हा ने वो तारीख दी जिसने भारतीय इतिहास के पन्नों में एक ऐतिहासिक पन्ना और जोड़ दिया। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि, इस मामले में दोनों पक्षों का बयान सुनना जरूरी है इसके लिए उन्होनें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया . 12 जून, 1975 को जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत अगले छह सालों तक इंदिरा गांधी को लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया गया। इस मामले को लेकर इंदिरा गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं . सुप्रीम कोर्ट का फैसला इंदिरा गांधी के पक्ष में कुछ हद तक चला गया था।

इस आदेश के अनुसार इंदिरा गांधी अपना मत तो नहीं दे सकती थीं, लेकिन वो संसद की कार्यवाही में भाग जरूर ले सकती हैं और उनकी लोकसभा की सदस्यता जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला विपक्षी दलों पर किसी परमाणु बम के हमले से कम न था। इस फैसले पर पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ रहने वाली पार्टियाँ एक सुर में इंदिरा गांधी के खिलाफ मैदान में आ गईं।

इसके साथ ही फैसले के अगले दिन विरोध का वो उन्माद दिखा जो भारतीय इतिहास में उस वक्त का सबसे बड़ा जन आंदोलन था। दिल्ली के रामलीला मैदान में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 25 जून 1975 को एक भयानक रैली आयोजित की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वो रैली उस वक्त की सबसे बड़ी रैली थी। पहली बार केंद्र सरकार के खिलाफ पूरे देश में विरोध देखने को मिला। इस रैली के बाद ही इंदिरा गांधी ने 25 जून की मध्य रात्रि को देश में इमरजेंसी लागू कर दिया और देश को कभी न भूलने वाली तारीख अता कर दी।

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