बप्पा रावल:इस हिन्दू राजा की थी 35 मुस्लिम महारानियां

बप्पा रावल का आतंक ऐसा था कि राजा उनसे लड़ने की बजाय अपनी बेटियों की शादी उनसे कर समझौता कर लेते थे

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बप्पा रावल सिसोदिया राजवंश के संस्थापक थे जिनमें आगे चल कर महान राजा राणा कुम्भा, राणा सांगा, महाराणा प्रताप जैसे अजेय योद्धा पैदा हुए. हुए।बप्पा रावल को कालभोज के नाम से भी जाना जाता है। अपने समकालीन राजाओं में बप्पा रावल का आतंक ऐसा था कि राजा उनसे लड़ने की बजाय अपनी बेटियों की शादी उनसे कर समझौता कर लेते थे .इस मामले में मुस्लिम राजा भी पीछे नहीं रहते थे. यही वजह है कि बप्पा रावल की सौ पत्नियों 35 रानियाँ मुस्लिम थी .

आज भी सिसौदिया वंशी राजपूत राजघराना मेवाड़ में स्थित है। इनके समय चित्तौड़ पर मौर्य शासक मान मोरी का राज था। 734 ई. में बप्पा रावल ने 20 वर्ष की आयु में मान मोरी को पराजित कर चित्तौड़ दुर्ग पर अधिकार किया।बप्पा रावल को हारीत ऋषि के द्वारा महादेव जी के दर्शन होने की बात मशहूर है। 735 ई. में हज्जात ने मेवाड़ पर अपनी फौज भेजी। बप्पा रावल ने हज्जात की फौज को हज्जात के मुल्क तक खदेड़ दिया। बप्पा रावल की तकरीबन 100 पत्नियाँ थीं, जिनमें से 35 मुस्लिम शासकों की बेटियाँ थीं, जिन्हें इन शासकों ने बप्पा रावल के भय से उन्हें ब्याह दीं।

बप्पा रावल, प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम व चालुक्य शासक विक्रमादित्य द्वितीय की सम्मिलित सेना ने अल हकम बिन अलावा, तामीम बिन जैद अल उतबी व जुनैद बिन अब्दुलरहमान अल मुरी की सम्मिलित सेना को पराजित किया।

753 ई. में बप्पा रावल ने 39 वर्ष की आयु में सन्यास लिया। इनका समाधि स्थान एकलिंगपुरी से उत्तर में एक मील दूर स्थित है। इस तरह इन्होंने कुल 19 वर्षों तक शासन किया। बप्पा रावल का देहान्त नागदा में हुआ, जहाँ इनकी समाधि स्थित है।

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