Battle of Chanderi:इस किले को जीतने बाबर की सेना ने एक ही रात में काट डाला पूरा पहाड़

मध्य युगीन इतिहास में चंदेरी का जौहर अब तक के इतिहास का सबसे विशाल जौहर माना जाता है।

0
1982

राजस्थान स्थित चंदेरी का किला आज भी राजपूतों के शौर्य और राजपुतानियों के जौहर की गाथा गाता है। इस किले का ऐतिहासिक महत्त्व ये है कि इसी की वजह से मुग़ल बादशाह बाबर को भारत में मजबूती से पाँव जमाने का मौक़ा मिला. चंदेरी का युद्ध 6 मई, 1529 ई. को मुग़ल बादशाह बाबर एवं राजपूतों के मध्य लड़ा गया था। उस समय चंदेरी का प्रसिद्ध दुर्ग मेदनीराय के अधिकार में था, जिस पर काफी समय से बाबर की नजर थी। खानवा युद्ध के बाद बाबर इसकी तरफ बढ़ा। बाबर ने मेदनीराय पर धावा बोला, लेकिन मेदनीराय ने किले का फाटक बंद कर दिया।

यह किला बाबर के लिए काफी महत्व का था इसलिए उसने मेदिनी राय से यह किला माँगा। बदले में उसने अपने जीते हुए कई किलों में से कोई भी किला राजा को देने की पेशकश भी की. परन्तु राजा चंदेरी का किला देने के लिए राजी ना हुआ। दरअसल नगर के सामने 230 फ़ीट ऊंची चट्टान पर चंदेरी का दुर्ग बना हुआ था। यह स्थान मालवा तथा बुंदेलखंड की सीमाओं पर स्थित होने के कारण से महत्वपूर्ण था। चंदेरी का किला आसपास की पहाड़ियों से घिरा हुआ था इसलिए ये ये बेहद सुरक्षित किला माना जाता था।बाबर के प्रलोभनों को नकार कर मेदनी ने बाबर से युद्ध करना स्वीकार किया।

गुस्से से बोखलाए बाबर ने किले को घेर कर युद्ध का ऐलान कर दिया .दरअसल बाबर की सेना में हाथी तोपें और भारी हथियार थे जिन्हें लेकर उन पहाड़ियों के पार जाना बेहद दुष्कर था और पहाड़ियों से नीचे उतरते ही चंदेरी के राजा की फौज का सामना हो जाता। कहा जाता है की बाबर निश्चय पर दृढ था और उसने एक ही रात में अपनी सेना से पहाडी को काट डालने को कहा।बाबर की सेना ने एक ही रात में एक पहाड़ी को ऊपर से नीचे तक काट कर एक ऐसी दरार बना डाली जिससे हो कर उसकी पूरी सेना और हाथी और तोपें ठीक किले के सामने पहुँच गयी

मेदनीराय ने जब सुबह अपने किले के सामने पूरी सेना को देखा तो दंग रह गया। लेकिन राजपूत राजा ने बिना घबराए अपने सिपाहियों के साथ बाबर की विशाल सेना का सामना करने का निर्णय किया। बोखलाए बाबर ने किले पर चारों ओर से इतनी जोर का हमला किया कि राजपुतानियों ने अपनी अस्मत बचाने के लिए जौहर किया और राजपूत केसरिया बाना पहन मैदान में कूद पड़े और वीरता पूर्वक लड़कर सब के सब वीरगति को प्राप्त हुए और किले पर बाबर का अधिकार हो गया। मध्य युगीन इतिहास में चंदेरी का जौहर अब तक के इतिहास का सबसे विशाल जौहर माना जाता है। बाबर की इस जीत के काफी दूरगामी प्रभाव हुए .कई राजपूतों ने बाबर के सामने हथियार डाल दिए और बाबर का पताका उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में लहराने लगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here