जब पुर्तगाली प्रेमिका ने बहादुरशाह जफ़र को मुग़ल तख़्त बख्शी

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मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत के बाद उसके बेटों में हिंदुस्तान के तख़्त पर काबिज होने के लिए मुग़ल शहजादों के बीच उत्तराधिकार युद्ध शुरू हो गया .लेकिन इस युद्ध में विजय बहादुरशाह जफ़र की हुई .लेकिन ये बहुत कम लोगों को पता है कि बहादुर शाह को इस जंग में जीत एक बहादुर पुर्तगाली महिला और उसके तोपचियों के कारण मिली .इस पुर्तगाली महिला का नाम था जूलियाना, जिसके तोपची सैनिकों की युद्ध में बहादुर शाह (प्रथम) की जीत तय करने में अहम भूमिका थी.

मुगल दरबार में जूलियाना की नियुक्ति में फादर मैगलेंस ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसी का नतीजा था कि वह बहादुर शाह (प्रथम) की सबसे कम उम्र की शिक्षिका बनीं. औरंगजेब ने जूलियाना को बहादुर शाह प्रथम के उस्ताद मुल्ला सालेह को हटा कर उसकी शिक्षिका नियुक्त किया था.यह कदम बहादुर शाह (प्रथम) और जूलियाना की जिंदगी के हिसाब से एक बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उस समय वे दोनों ही जवान थे, तब बहादुर शाह (प्रथम) की उम्र अठारह साल तो जूलियाना सत्रह साल की थी.

जूलियाना ने मुगल शहज़ादे-शहज़ादियों सहित शाही ख़ानदान के दूसरे बच्चों को भी पढ़ाया था. दिल्ली में दारा शिकोह की हवेली में बहादुर शाह (प्रथम) और जूलियाना की पहली मुलाकात हुई थी जो कि उस समय बहादुरशाह (प्रथम) का निवास स्थान था.1681-82 के आस-पास जूलियाना गोवा से मुगल दरबार में पहुंची थी और शीघ्र ही औरंगजेब की बेग़म और बहादुर शाह (प्रथम) की मां नवाब बाई की ख़िदमत में लग गई थी.

जब 1686 में बहादुर शाह (प्रथम) और उसकी मां के औरंगजेब के गुस्से का शिकार होकर कैद हुए तब जूलियाना ने उनके प्रति अपनी अटूट वफादारी निभाई, बहादुर शाह (प्रथम) के गोलकुंडा के शासक अब्दुल हसन के साथ मेलजोल बढ़ाने से नाराज़ होकर औरगंजेब ने उसे कैद में डाल दिया था.1693 में हालात बहादुर शाह (प्रथम) के हक में हुए और यहाँ तक कि उसे कैद से निकालने में भी जूलियाना ने भूमिका निभाई, जूलियाना के बहादुर शाह (प्रथम) की शिक्षिका होने और फिर उसके जनाना में मुख्य परिचारिका होने के कारण इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि उसने कैद के दौरान बहादुर शाह प्रथम की बहुत मदद की थी, यह बात जूलियाना की भक्ति, निष्ठा और बहादुर शाह (प्रथम) के साथ उसके विशेष संबंध का प्रतीक है.

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