सरदार पटेल ने हैदराबाद स्टेट को ऐसे बनाया भारत का हिस्सा

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जिस समय ब्रिटिश भारत छोड़ रहे थे, उस समय यहाँ के 562 रजवाड़ों में से सिर्फ़ तीन को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का फ़ैसला किया. ये तीन रजवाड़े थे कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद. हैदराबाद की आबादी का अस्सी फ़ीसदी हिंदू लोग थे लेकिन राजकाज मुसलामानों के हाथ में था. हिन्दू बहुल होने के कारण ही भारत सरकार हैदराबाद का विलय भारत में करवाना चाहती थी लेकिन हैदराबाद के निजाम भारत में विलय के किस क़दर ख़िलाफ थे, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जिन्ना को संदेश भेज भारत के खुइलाफ लड़ाई में पाकिस्तान से मदद माँगी जिसे जिन्ना ने ठुकरा दिया .

उधर नेहरू माउंटबेटन की उस सलाह को गंभीरता से लेने के पक्ष में थे कि इस पूरे मसले का हल शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए. लेकिन सरदार पटेल नेहरू के से सहमत नहीं थे. उनका मानना था कि उस समय का हैदराबाद ‘भारत के पेट में कैंसर के समान था,’ जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था.पटेल को इस बात का अंदाज़ा था कि हैदराबाद पूरी तरह से पाकिस्तान के कहने में था.नेहरु की मर्जी के बगैर पटेल हैदराबाद के निजाम के साथ सख्ती बरतने के पक्ष में थे. एक समय जब निज़ाम को लगा कि भारत हैदराबाद के विलय के लिए दृढ़संकल्प है तो उन्होंने ये पेशकश भी की कि हैदराबाद को एक स्वायत्त राज्य रखते हुए विदेशी मामलों, रक्षा और संचार की ज़िम्मेदारी भारत को सौंप दी जाए.लेकिन निजाम के अंदरूनी विरोधी इससे सहमत नहीं थे.

इसी बीच 22 मई को जब हैदराबाद के लोगों ने ट्रेन में सफ़र कर रहे हिंदुओं पर गंगापुर स्टेशन पर हमला बोला तो पूरे भारत में सरकार की आलोचना होने लगी कि वो उनके प्रति नर्म रुख़ अपना रही है.यही वो घटना थी जिसने पटेल को बुरी तरह उकसा दिया। उन्होंने फ़ौरन सेनाध्यक्ष जनरल करियप्पा को हैदराबाद पर कार्रवाई करने का आदेश दे दिया. दो बार हैदराबाद में घुसने की तारीख़ तय की गई लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते इसे रद्द करना पड़ा. इधर नेहरू और गवर्नर राजगोपालाचारी इस मसले का हल ढूंढने की कोशिश कर ही रहे थे कि पटेल ने घोषणा की कि भारतीय सेना हैदराबाद में घुस चुकी है और इसे रोकने के लिए अब कुछ नहीं किया जा सकता.”भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ऑपरेशन पोलो का नाम दिया गया क्योंकि उस समय हैदराबाद में विश्व में सबसे ज़्यादा 17 पोलो के मैदान थे.

पांच दिनों तक चली इस कार्रवाई में 1373 रज़ाकार मारे गए. हैदराबाद स्टेट के 807 जवान भी खेत रहे. भारतीय सेना ने अपने 66 जवान खोए जबकि 97 जवान घायल हुए.इस तरह हैदराबाद भारत में विलय हो गया।

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