हेमचन्द्र विक्रमादित्य (हेमू ) दिल्ली का आख़िरी हिन्दू सम्राट जिसने मुगलों को भारत से खदेड़ दिया था

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भारतीय इतिहास में पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अंतिम हन्दू सम्राट माना जाता है. लेकिन कई इतिहासकार हेमचन्द्र विक्रमादित्य को दिल्ली का आख़िरी हन्दू सम्राट मानते है जिसे अकबर ने पानीपत के दूसरे यद्ध में परास्त कर फिर से मुगलों की सत्ता स्थापित की थी. ये युद्ध अकबर ने बहादुरी से नहीं बल्कि अपने संरक्षक हेमू की चालाकी से हराया था .

राजा विक्रमाजीत हेमू का जन्म मेवात स्थित रिवाड़ी के एक अति सामान्य अग्रवंशी बनिया परिवार में हुआ था. अपने वैयक्तिक गुणों तथा कार्यकुशलता के कारण हेमू सम्राट् आदिलशाह के दरबार का प्रधान मंत्री बन गया था। यह राज्य कार्यो का संचालन बड़े योग्यता पूर्वक करता था। आदिलशाह स्वयं अयोग्य था और अपने कार्यों का भार वह हेमू पर डाले रहता था।

जिस समय हुमायूँ की मृत्यु हुई उस समय आदिलशाह मिर्जापुर के पास चुनार में रह रहा था। हुमायूँ की मृत्यु का समाचार सुनकर हेमू अपने स्वामी की ओर से युद्ध करने के लिए दिल्ली की ओर चल पड़ा। वह ग्वालियर होता हुआ आगे बढ़ा और उसने आगरा तथा दिल्ली पर अपना अधिकार जमा लिया। तरदीबेग खाँ दिल्ली की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया था। हेमू ने बेग को हरा दिया और वह दिल्ली छोड़कर भाग गया।

इस विजय से हेमू के पास काफी धन, लगभग 1500 हाथी तथा एक विशाल सेना एकत्र हो गई थी। उसने अफगान सेना की कुछ टुकड़ियों को प्रचुर धन देकर अपनी ओर कर लिया। उसके बाद उसने प्राचीन काल के अनेक प्रसिद्ध हिंदू राजाओं की उपाधि धारण की और अंत में सर्वोच्च ‘राजा विक्रमादित्य’ अथवा विक्रमाजीत की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वह अकबर तथा बैरम खाँ से लड़ने के लिए पानीपत के ऐतिहासिक युद्धक्षेत्र में जा डटा। 5 नवम्बर 1556 को युद्ध प्रारंभ हुआ। इतिहास में यह युद्ध पानीपत के दूसरे युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है।

हेमू की सेना संख्या में अधिक थी तथा उसका तोपखाना भी अच्छा था किंतु एक तीर उसकी आँख में लग जाने से वह बेहोश हो गया। हेमू को लड़ाई के मैदान में गिरते देख उसकी सेना भाग खड़ी हुई . हेमू को पकड़कर अकबर के सम्मुख लाया गया.अकबर हेमू को कैद करना चाहता था लेकिन बैरम खान ने अकबर की मर्जी के विरुद्ध हेमू का क़त्ल कर दिया .इस तरह दिल्ली से हिन्दुओं की सत्ता का अंत हो गया .

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