नवाब वाजिद अली शाह: (part-1) अपनी जूतियां खुद ना पहन पाने के कारण अंग्रेजों के गुलाम बने नवाब साहब

अपनी जूतियां खुद न पहन पाने के चलते नवाब साहब अंग्रेज़ों के हाथों गिरफ्तार हो गए. वाजिद अली शाह के बारे में कहा जाता है कि वो जूतियां न पहन पाने के चक्कर में भाग नहीं पाए. वाजिद अली शाह को 1856 में ही कलकत्ता निष्कासित कर दिया गया था. जब 1857 का गदर हुआ तब वे मटियाबुर्ज में थे. जहां ऐतिहातन उन्हें नज़रबंद कर दिया गया.

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हिंदुस्तान का इतिहास अजीबो-गरीब नवाबी शौक के लिए भी जाना जाता है .इनमें से ही एक थे अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह,जिनकी नवाबी फकत इसलिए ख़त्म हो गई कि उन्हें अपने जूते खुद पहनना पसंद नहीं था . अपनी जूतियां खुद न पहन पाने के चलते नवाब साहब अंग्रेज़ों के हाथों गिरफ्तार हो गए. वाजिद अली शाह के बारे में कहा जाता है कि वो जूतियां न पहन पाने के चक्कर में भाग नहीं पाए. वाजिद अली शाह को 1856 में ही कलकत्ता निष्कासित कर दिया गया था. जब 1857 का गदर हुआ तब वे मटियाबुर्ज में थे. जहां ऐतिहातन उन्हें नज़रबंद कर दिया गया.

दरअसल 9 साल तक अवध के शासक रहे वाजिद अली शाह को विरासत में एक कमजोर राज्य मिला. उनके पहले के नवाब अंग्रेज़ों से भिड़ चुके थे और हार चुके थे. अवध को इसके चलते अंग्रेज़ों को भारी जुर्माना देते रहना पड़ता था. शाह ने शासन संभाला और रोज़ दोपहर लखनऊ में अपनी पलटनों की परेड की सलामी लेना शुरू किया. अंग्रेज अधिकारियों ने तमाम तरीकों से दवाब बनाकर नवाब का इस परेड में जाना रुकवाया. इसके तुरंत बाद लॉर्ड डलहॉजी भारत आया और उसने अवध को अपने कब्जे में लेकर वाजिद अली शाह को देश निकला दे दिया . अवध अंग्रेज़ों के कब्जे़ में आया तो, मगर 1857 के विद्रोह में सबसे आखिर में. वो भी लखनऊ शहर में 20 हज़ार मौतों के बाद.

नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता भेज दिया गया था, जहाँ उन्होंने अपने पूरे जीवन को काफी अच्छे से बिताया। नवाब वाजिद अली शाह का इन्तकाल 1 सितंबर 1887 को भारत के कोलकाता में हुआ था, जबकि उनका मकबरा मटियाबुर्ज के इमामबाड़ा सिबटेनाबाद में स्थित है।

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