जब इंद्र कुमार गुजराल ने संजय गांधी को दी औकात में रहने की सलाह | Mix Pitara

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संजय गांधी के बारे में कहा जाता है कि वो इंदिरा गांधी मंत्रीमंडल के मंत्रियों को चपरासी से ज्यादा कुछ नहीं समझते थे. सारे मंत्रियों को संजय गांधी के दरबार में सारे मंत्रियों को हाजिरी लगानी पड़ती थी .फैसले सारे संजय गांधी लेते थे मंत्रियों को बस उस पर अमल करना होता था. लेकिन ऐसे ही समय में एक मंत्री ऐसा भी जो संजय गाँधी से दबने को तैयार नहीं था. ये थे इंद्र कुमार गुजराल जिस पर संजय गांधी का वश नहीं चल पा रहा था.

इंद्र कुमार गुजराल इंदिरा सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री थे. एक कैबिनेट मीटिंग के बाद संजय गांधी का गुजराल को फरमान दिया कि मैं ऑल इंडिया रेडियो के न्यूज बुलेटिन प्रसारित होने से पहले देखना चाहता हूं. गुजराल ने दो टूक जवाब दिया. ये मुमकिन नहीं. मैं भी प्रसारण से पहले कभी नहीं देखता. तभी इंदिरा आई और बात को टालते हुए बोली , इसे बाद में देखते हैं.

कुछ रोज बाद गुजराल को प्रधानमंत्री आवास में तलब किया गया . जब गुजराल वहां पहुंचे तब तक इंदिराअपने दफ्तर के लिए निकल चुकी थी. उनके सामने संजय गांधी खड़े थे. . संजय ने गुजराल को चेतावनी देते हुए कहा कि , देखिए ऐसे नहीं चलेगा. गुजराल ने वो जवाब दिया, जिसके बारे में इंदिरा कैबिनेट का और कोई मंत्री सोच भी नहीं सकता था. गुजराल बोले, देखिए यहां. जब तक मैं हूं ऐसे ही चलेगा. और आप यह तमीज सीखेंगे कि वरिष्ठों से कैसे बात की जाती है. गुजराल यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि मेरी आपके प्रति कोई जवाबदेही नहीं है. मैं आपकी मम्मी की सरकार में मंत्री हूं. यह कहकर गुजराल चले गए और फिर उनसे इस्तीफा मांग लिया गया.बाद में गुजराल भारत के प्रधानमंत्री बने .

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