शिवाजी महाराज से प्रेम करती थी औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा ,शादी के लिए बादशाह ने रखी ये शर्त

शिवाजी जेबुन्निसा की भावनाओं की बहुत कद्र करते थे लेकिन उन्हें धर्म बदलना स्वीकार नहीं था। इसलिए उन्होंने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

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जब शिवाजी महाराज को औरंगजेब ने आगरा के किले में नजरबन्द किया तो कहा जाता है कि कोई अज्ञात शख्स ऐसा भी था जो शिवाजी की मदद कर रहा था जिसके इशारे पर औरंगजेब के विश्वस्त लोगों को पहरे से हटाकर राजा मान सिंह के लोगों को पहरे पर तैनात किया गया था. शिवाजी की सुरक्षा मान सिंह की नैतिक जिम्मेदारी थी क्योंकि वही शिवाजी महाराज को औरंगजेब के दरबार में लेकर आए थे. ये अज्ञात शख्स थी औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा जो मन ही मन महाराज को अपना दिल दे बैठी थी. ये कहानी है जेबुन्निसा और शिवाजी महाराज के बारे में। इस कहानी का जिक्र किताब शिवाजी द ग्रेट फ्राम आगरा नाम की किताब में किया गया है।
औरंगजेब के शासन में शिवाजी की बहादुरी की कहानी न सिर्फ दिल्ली बल्कि देश के और भी कोनों में तेजी से फैल रही थी।शिवाजी अपने पराक्रम से कई राजाओं को धूल चटा चुके थे। इन राजाओं में मुगल घराने का शायिस्ता खान भी शामिल था। शायिस्ता खान से हुई जंग में शिवाजी ने उसके महल में घुसकर उसके बेटे का सिर धड़ से अलग कर दिया था। धीरे-धीरे दिन गुजरते गए और मुगल दरबार में शिवाजी के किस्से बढ़ते चले गए। जेबुन्निसा का लगाव शिवाजी के लिए बढ़ता ही जा रहा था। जेबुन्निसा को 27 साल की ही उम्र में ही मराठा योद्धा से प्यार हो गया था। उस वक्त शिवाजी की उम्र 39 साल थी और उनका आठ साल का एक बेटा भी था।


मान सिंह के समझाने पर जब शिवाजी मुगल दरबार पहुंचे तो जेबुन्निसा नंगे पैर भागती हुई दरबार तक पहुंच गई। उस समय दरबार में राजकुमारी किसी के सामने नहीं जा सकती थी। औरंगजेब शिवाजी की ताकत को जानता था। वो सोचने लगा कि अगर इस योद्धा की शादी अपनी बेटी से कर दे तो मुगलों को मराठाओं से फिर कोई भी चिंता नहीं होगी। औरंगजेब को शिवाजी को लेकर अपनी बेटी जेबुन्निसा की भावनाओं का पता था इसलिए उसने एक चाल चली .औरंगजेब ने शिवाजी को अपने बेटी से शादी करने का प्रस्ताव दिया लेकिन इसके लिए उसने एक शर्त रखी। औरंगजेब ने कहा कि वो छत्रपति महराज को अपनी बेटी और राजा का भी पद देगा लेकिन इसके लिए उन्हें इस्लाम कुबूल करना होगा। शिवाजी जेबुन्निसा की भावनाओं की बहुत कद्र करते थे लेकिन उन्हें धर्म बदलना स्वीकार नहीं था। इसलिए उन्होंने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

इस तरह शिवाजी को कैद कर लिया गया .मराठी साहित्य के जानकारों का ये भी कहना है कि शिवाजी और जेबुन्निसा की शादी इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि औरंगजेब की तरफ से ये शर्त रखी गई थी कि शिवाजी को मुस्लमान बनना पड़ेगा। साहित्यकारों के मुताबिक जब जेबुन्निसा को जब इस शर्त के बारे में पता चला तो उन्हें अपने पिता से नफरत हो गई। वो पूरी जिंदगी कुंवारी रहीं और अपने पिता से नफरत करती रहीं।

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