राजा दाहिर पर जीत की कीमत मुहम्मद-बिन-कासिम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी

कासिम ने दाहिर से सीधे लड़ने की बजाय दाहिर के दुश्मनों को अपनी तरफ मिलाने की रणनीति अपनाई .सिंध में दाहिर का सामना कासिम से हुआ .शुरुआत में कासिम के पैर उखड़ते नजर आए लेकिन अचानक दाहिर के सीने में तीर लग गया और उसकी मौत हो गई .

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अरब लुटेरा मुहमद बिन कासिम के बारे में कहा जाता है कि उसने भारत में मुसलामानों के पैर मजबूती से जमाने में काफी महत्वपूर्ण रोल अदा किया .कासिम ने राजा दाहिर सेन को हरा कर पूरे सिंध पर कब्ज़ा कर लिया लेकिन इस जीत का उपहार उसे मृत्यदंड के रूप में मिला .इसकी वजह ये थी कि उसने राजा दाहिर की बेटियों का कौमार्य भंग किया था जिससे नाराज होकर खलीफा हज्जाज ने उसे मौत की सजा सुना दी.

एक बार श्रीलंका से ईराक जा रही एक जहाज को लुटेरों ने रास्ते में लूट लिया जिसमें कई मुस्लिम महिलाओं को अपनी अस्मत गंवानी पडी. इस घटना से नाराज ईराक के खलीफा हज्जाज ने सिंध के राजा दाहिर सेन को इन लुटेरों को सजा देने को कहा जिसे दाहिर ने ठुकरा दिया .हज्जाज इससे काफी खफा हो गया और उसने अपने सेनापति को सिंध पर आक्रमण करने को भेज दिया .इस युद्ध में हज्जाज का सेनापति हार कर भाग खडा हुआ और उसकी पूरी सेना को दाहिर के बेटे ने गाजर-मूली की तरह काट डाला. इस पराजय से आगबबुला हुए हज्जाज ने अपने दामाद मुहम्मद बिन कासिम को सिंध पर आक्रमण करने को भेज दिया .

कासिम ने दाहिर से सीधे लड़ने की बजाय दाहिर के दुश्मनों को अपनी तरफ मिलाने की रणनीति अपनाई .सिंध में दाहिर का सामना कासिम से हुआ .शुरुआत में कासिम के पैर उखड़ते नजर आए लेकिन अचानक दाहिर के सीने में तीर लग गया और उसकी मौत हो गई .दाहिर की मौत के बाद उसके परिवार ने कासिम के खिलाफ हथियार उठाया लेकिन गद्दारों के गुप्त रहस्य ने कासिम की विजय आसान बना दी. इस युद्ध में कासिम की जीत हुई .दाहिर की रानियों ने जौहर कर अपना स्वाभिमान बचाया .लेकिन कासिम दाहिर की दो पुत्रियों को बंदी बनाने में कामयाब हो गया.

कासिम ने इन दोनों को हज्जाज के पास बतौर तोहफा भेजा .जहाँ इन लड़कियों ने कासिम द्वारा अपना कौमार्य भंग कर देने की व्यथा सुनाई .इससे हज्जाज इतना नाराज हो गया कि उसने कासिम को मौत के घाट उतारने का फरमान जारी कर दिया .इस फरमान के बाद कासिम के ही सैनिकों ने उसे मौत के घाट उतार दिया. इस तरह सिंध विजय की कीमत कासिम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी.

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