जब बिहार के इस सी एम् के नए कुर्ते के लिए लगाना पड़ा चंदा | Mix Pitara

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आज भले ही भारतीय राजनेताओं की चाल और चरित्र पर सवालिया निशान लगाए जाते हैं लेकिन एक वक़्त ऐसा भी था जब नेता जनता के आइडल हुआ करते थे. इन दिनों अगर कोई एक बार एम् एल ए या एम् पी बन जाए तो उन्हें धनकुबेर बनते देर नहीं लगती लेकिन कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्य मंत्री रहे लेकिन उनके पास पहनने को एक ढंग का कुर्ता भी नहीं था. वो अक्सर फटा हुआ कुर्ता और टूटी हुई चप्पल के साथ बड़े-बड़े समारोह में पहुँच जाते .एक बार ऐसी नौबत आ गयी कि नेताओं को कर्पूरी ठाकुर के लिए नया कुर्ता लाने के लिए चन्दा इकट्ठा करने की जरुरत पड़ गई .

1977 में जेपी आवास पर जयप्रकाश नारायण का जन्म दिन मनाया जा रहा था.पटना के कदम कुआं स्थित चरखा समिति भवन में, जहां जेपी रहते थे,देश भर से जनता पार्टी के बड़े नेता जुटे हुए थे. उन नेताओं में चंद्रशेखर, नानाजी देशमुख शामिल थे.मुख्यमंत्री पद पर रहने बावजूद फटा कुर्ता, टूटी चप्पल और बिखरे बाल कर्पूरी ठाकुर की पहचान थे.उनकी दशा देखकर एक नेता ने टिप्पणी की, ‘किसी मुख्यमंत्री के ठीक ढंग से गुजारे के लिए कितना वेतन मिलना चाहिए?’ सब निहितार्थ समझ गए. हंसे.फिर चंद्रशेखर अपनी सीट से उठे. उन्होंने अपने लंबे कुर्ते को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर सामने की ओर फैलाया. वह बारी-बारी से वहां बैठे नेताओं के पास जाकर कहने लगे कि आप कर्पूरी जी के कुर्ता फंड में दान कीजिए. तुरंत कुछ सौ रुपए एकत्र हो गए.उसे समेट कर चंद्रशेखर जी ने कर्पूरी जी को थमाया और कहा कि इससे अपना कुर्ता-धोती ही खरीदिए. कोई दूसरा काम मत कीजिएगा. चेहरे पर बिना कोई भाव लाए कर्पूरी ठाकुर ने कहा, ‘इसे मैं मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करा दूंगा.’

यानी तब समाजवादी आंदोलन के कर्पूरी ठाकुर को उनकी सादगी और ईमानदारी के लिए जाना जाता था, पर आज के कुछ समाजवादी नेताओं को? कम कहना और अधिक समझना !

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