जब दामाद फ़िरोज़ गांधी ने उजागर किया नेहरु का घोटाला,वित्त मंत्री को देना पड़ा

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फ़िरोज़ गांधी के बारे में कहा जाता है कि वो ईमानदार छवि वाले नेता थे और राजनीति में किसी भी तरह के करप्शन को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थे .यही वजह है कि कांग्रेस का सांसद होने के बावजूद जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी से उनकी बिलकुल नहीं बनती थी .वो साकार की नीतियों के खिलाफ जमकर हमला बोलते और कई बार नेहरु जी की परेशानी का कारण बन जाते .एक बार फ़िरोज़ गांधी ने नेहरु सरकार के एक ऐसे घोटाले को उजागर किया जिसके कारण नेहरु के वित्त मंत्री टीटी कृष्णामाचारी को इस्तीफा देना पड़ गया.

कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को आज़ाद भारत के पहले ऐसे घोटाले के बतौर याद किया जाता है जिसे तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जोड़कर देखा गया. 1957 में मूंदड़ा ने सरकारी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी के ज़रिए अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपए का निवेश कराया.यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इन्वेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया. जब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था.इस केस को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दामाद फ़िरोज़ गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे क्योंकि इससे देश की छवि खराब होती थी.

नेहरू ने अपने वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी कीं, मगर आख़िरकार उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.इस इस्तीफे के बाद नेहरु और फ़िरोज़ और नेहरु परिवार के संबंध बहुत ज्यादा खराब हो गए .

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