सिकंदर के सेनापति को क्यों करना पड़ा चन्द्रगुप्त मौर्य से अपनी बेटी का विवाह !

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भारत के सबसे महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की वीरता के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे। मगर चंद्रगुप्त और हेलेना की प्रेम कहानी आपने शायद ही सुनी हो। हेलेना सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर की बेटी थी़ चूंकि सिकंदर का कोई वारिस नहीं था, इसलिए उसकी मौत के बाद उसके साम्राज्य को उसके सेनापतियों ने आपस में बांट लिया़ सेल्यूकस को साम्राज्य का पूर्वी हिस्सा प्राप्त हुआ, जिसमें भारत का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा भी शामिल था़ सेल्यूकस की बेटी हेलेना एक अपूर्व सुंदरी थी, जिसे अपना बनाने की चाहत कई यूनानी नौजवान रखते थ़े लेकिन हेलेना की आंखें तो किसी और को ढूंढ़ रही थीं और वह थे चंद्रगुप्त मौर्य.

इस बीच चंद्रगुप्त चाणक्य की मदद से नंद वंश का नाश करने में सफल हो गये और उन्होंने उत्तर भारत में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया़ चंद्रगुप्त को इस बात की कोई भनक नहीं थी कि हेलेना उनसे प्यार करती है़ इस बीच हेलेना बेबिलोनिया चली गयी़ चंद्रगुप्त की तो जैसे जिंदगी चली गयी़

क्षत्रपों की बगावत कुचलने के लिए सेल्यूकस को भारत में मदद की जरूरत थी और उसकी यह जरूरत तब सिर्फ चंद्रगुप्त ही पूरी कर सकते थ़े उसने मदद मांगी और चंद्रगुप्त ने विद्रोहियों को दबाने में उसकी मदद की़ इस एहसान तले दबे सेल्युकस ने अपनी बेटी हेलेना का विवाह चन्द्रगुप्त से कर दिया.

इतिहासकार लिखते हैं कि चंद्रगुप्त भव्य बारात लेकर हेलेना से विवाह करने पहुंचा था़ विवाह के बाद चंद्रगुप्त हेलेना को लेकर पाटलीपुत्र आ गये. यही हेलेना बिंदुसार की सौतेली मां बनी़ एक तरह से चंद्रगुप्त और हेलेना की शादी यूनानी और भारतीय संस्कृति का मिलन थी और संदेश यह कि युद्ध पर प्यार भारी पड़ता है़

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