नवाब आसफ़ुद्दौला:एक रंगीन मिजाज और दरियादिल अवध का नवाब

नवाब आसफ़ुद्दौला अवध का एक रंगीन मिज़ाज और दरियादिल नवाब था जिसने एक दफ़ा तो अपने खानसामे को वज़ीर बना दिया.नवाब साहब इतने ऐय्याश थे कि उन्होंने कुंवारे लड़कों का एक हरम बना रखा था. उनकी कई रानियाँ तो ताउम्र कुंवारी ही रह गई. उन्हें कभी नवाब के दर्शन ही नहीं हुए. 

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लखनऊ के नवाब बहादुरी के लिए तो नहीं, लेकिन अपनी तुनकमिज़ाजी और ऐयाशी के लिए जरूर जाने जाते हैं. नवाब आसफ़ुद्दौला भी इनमें से एक था.  नवाब आसफ़ुद्दौला अवध का एक रंगीन मिज़ाज और दरियादिल नवाब था जिसने एक दफ़ा तो अपने खानसामे को वज़ीर बना दिया.नवाब साहब इतने ऐय्याश थे कि उन्होंने कुंवारे लड़कों का एक हरम बना रखा था. उनकी कई रानियाँ तो ताउम्र कुंवारी ही रह गई. उन्हें कभी नवाब के दर्शन ही नहीं हुए. 

शुजाउद्दौला के बाद नवाब आसफ़ुद्दौला को फ़ैज़ाबाद की गद्दी मिली थी. वह अवध की राजधानी को फ़ैज़ाबाद से लेकर लखनऊ आया. नवाब शुजाउद्दौला अपने बेटे से नाख़ुश था, पर बहू बेग़म के चलते उसने आसफ़ुद्दौला को नवाब बनाया. शुजाउद्दौला के मरने का मातम भी पूरा नहीं हुआ था कि वो ऐयाशी करने मेहंदी घाट, कन्नौज चला गया. उसने अपने मंत्री को बहू बेग़म के पास को भेजकर खर्च के लिए रुपये मांगे. बताया जाता है कि हैरतज़दा बेग़म ने उससे कहा, ‘आसफ़ुद्दौला के पास क्या बाप के मरने पर आंसू बहाने का वक़्त नहीं है?’ बेग़म ने उसे छह लाख रु भिजवाये. ये ख़त्म हुए कि उसने और चार लाख की मांग रख दी. जब ये भी कम पड़ गए तो वह ख़ुद फ़ैज़ाबाद गया और अपनी जागीर के कुछ हिस्से बेग़म के पास गिरवी रखकर चार लाख रुपये उधार लिए.बात यहीं तक नहीं रुकी. बाद में उसने बहू बेग़म की संपत्ति हड़पने के लिए उन्हें नज़रबंद करवाकर उनपर अत्याचार करवाए. मज़बूरी में बहू बेग़म को उसे 31 लाख रुपये, 70 हाथी, 860 बैलगाड़ियां और कई कीमती जवाहरात देने पड़े. 

नवाब आसफ़ुद्दौला समलैंगिक था और उसका कम उम्र के लड़कों का एक हरम भी था. ब्रिटिश इतिहासकार रोसी लेलेवेलन जोंस ने नवाब के ख़िलाफ़ वारेन हेस्टिंग्स को भेजी गयी रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि नवाब के समलैंगिक प्रवृति होने के चलते उसकी रानियां कई वर्षों तक कुंवारी रही थीं. शुजाउद्दौला अपने बेटे की इस आदत से इतना ख़फ़ा हो गया था कि उसने आसफ़ुद्दौला की हत्या करने की ठान ली थी. पर बहू बेग़म के बीच-बचाव के चलते उसकी जान बच गयी.

शुजाउद्दौला ने तवायफ़ संस्कृति की शुरुआत की थी. आसफ़ुद्दौला बाप से एक कदम आगे निकल गया. बड़ी मिसरी, सालारो, राम कली, हीराजान, जलालो और ख़ुर्शीद जान उसके समय की कुछ प्रमुख तवायफ़ें थीं जिनका दख़ल राजकाज में भी था. आसफ़ुद्दौला को शराब का इस हद तक शौक था कि उसने अपने मंत्री भी वही रख लिए जो शराब पीने में उसका साथ देते थे.

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