जब मेवाड़ के घोड़े शुभ्रक ने कुतुबुद्दीन को मार कर भारत पर आक्रमण का बदला लिया

शुभ्रक बेकाबू हो गया और उसने ऐबक को जमीन पर पटक दिया और बिना उसे संभलने का मौका दिए उसके सिर और छाती पर अपने मजबूत खुरों से जबरदस्त प्रहार करने लगा। कुछ ही प्रहारों से ऐबक की वहीँ तत्काल मृत्यु हो गई।

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भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का नाम तो सबने सुना है.हल्दीघाटी के युद्ध में जब राणा दुश्मनों की सेना से घिर गए तब चेतक ने ही अपने प्राण देकर उनकी जान बचाई थी .लेकिन क्या आपने कभी शुभ्रक घोड़े के बारे में सूना है. मेवाड़ के राजकुमार कर्ण सिंह के पास शुभ्रक नाम का घोड़ा था जिसमें कर्ण सिंह को अपने प्राणों की बलि देकर क़ुतुब-उद्दीन-ऐबक की कैद से आजाद कराया था .

इतिहास के पन्नों में दर्ज़ है कि दिल्ली सल्तनत के गुलाम वंश के पहले शासक क़ुतुब-उद्दीन-ऐबक की मौत घोड़े से गिरने पर हुई थी। लेकिन एक लड़ाका सरदार जिसने ग्यारह साल की उम्र में घुड़सवारी शुरू की और घोड़े पर बैठ कर अनगिनत लड़ाइयां लड़ी क्या घोड़े से गिर कर मर सकता है?

वस्तुतः जब क़ुतुब-उद्दीन-ऐबक ने राजपूताने पर चढ़ाई की तो मेवाड़ के राजा की हत्या कर राजकुँअर कर्ण सिंह को बंदी बना लिया। लूटी हुई धनराशि और राजकुमार के साथ वह अपने साथ राजकुमार के घोड़े शुभ्रक को भी लाहौर ले गया जहाँ से राजकुमार ने भागने की कोशिश की और पकड़े गए। क़ुतुब-उद्दीन-ऐबक ने राजकुमार का सर काट कर कटे सर से पोलो मैच खेलने का आदेश दिया। क़ुतुब-उद्दीन-ऐबक भी शुभ्रक पर सवार हो कर मैच देखने पहुंचा। शुभ्रक ने तत्क्षण अपने मालिक कर्ण सिंह को पहचान लिया और जोर-जोर से हिनहिनाने और चीत्कार करने लगा। कुछ ही क्षणों में शुभ्रक बेकाबू हो गया और उसने ऐबक को जमीन पर पटक दिया और बिना उसे संभलने का मौका दिए उसके सिर और छाती पर अपने मजबूत खुरों से जबरदस्त प्रहार करने लगा। कुछ ही प्रहारों से ऐबक की वहीँ तत्काल मृत्यु हो गई।

सभी स्तब्ध रह गए। पूरी सेना राजकुमार और शुभ्रक को मारने दौड़ पड़ी। शुभ्रक विद्युत गति से अपने मालिक की और दौड़ा और जैसे ही राजकुमार उस पर सवार हुए शुभ्रक ने अपने जीवन की सबसे कठिन यात्रा शुरू की। शुभ्रक तीन दिनों तक लगातार दौड़ता रहा और सीधा मेवाड़ के प्रवेश द्वार पर जाकर रुका। जब राजकुमार घोड़े से उतरे तो शुभ्रक मूर्ति की तरह खड़ा रह गया। राजकुमार ने ज्योंही हाथ से उसका सिर सहलाया शुभ्रक जमीन गिर पड़ा। प्राण त्यागने से पहले उसने अपने मालिक को सुरक्षित अपने राज्य में पहुंचा दिया था।

हमने चेतक की स्वामिभक्ति की अनेकों कहानियां सुनी है पर शुभ्रक की यह कहानी हम में से अधिकतर लोगों ने नहीं सुनी। सुनी है क्या ?

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