मुहम्मद शाह रंगीला : नग्न होकर दरबार चलाने वाला मुग़ल बादशाह

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दिल्ली के तख्त ताज पर कई बहादुर मुगल बादशाह आसीन हुए हैं। बाबर, हुमायूं, अकबर, शाहजहां, औरंगजेब, जांहगीर और बहादुर शाह जफर जैसे बादशाहों का नाम हमेशा किसी ना किसी अलग-अलग वजहों से जाना जाता रहा है। लेकिन इन्हीं सब से अलग एक मुगल बादशाह भी रहा, जो अपनी रंगीनियों के लिए जाना जाता रहा है। यहां तक कि लोगों ने उसके नाम के पीछे भी रंगीला उपनाम की तरह जोड़ दिया था। इनका नाम था मुहम्मद शाह, लेकिन इतिहास इन्हें मुहम्मद शाह रंगीला के नाम से जानता है।

मुहम्मद शाह रंगीला अपने नाम के अनुरूप ही काफी रंगीन मिजाज थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद रंगीला ने कलाकारों को प्रोत्साहित करना शुरू किया। रंगीला खुद, रंगीन मिजाज का था। यही नहीं वो जंगलों में युवतियों के ड्रेस पहनकर जाता था। कई बार तो दरबार में भी वो युवतियों के कपड़े या फिर नंगे ही आता था। और दरबारियों को भी नग्न होने के लिए कहता था।

ये वही मुग़ल बादशाह हैं जिसने नादिरशाह को कोहिनूर हीरा भेंट कर दिया था .दरअसल रंगीला की एक रखैल थी नूरबाई .नादिरशाह ने जब मुग़ल सल्तनत को बंदी बनाया तो नूर बाई ने नादिरशाह से भीसांठ-गाँठ कर ली और उसी ने नादिरशाह को बताया कि बादशाह ने कोहिनूर को अपनी पगड़ी में छुपा रखा है .घाघ नादिरशाह ने पगड़ी बदल रस्म के बहाने कोहिनूर को अपने कब्जे में कर लिया .

बेतहाशा शराब पीने और अफ़ीम की लत ने मोहम्मद शाह को अपनी सल्तनत ही की तरह अंदर से खोखला कर दिया था इसीलिए उन की उम्र छोटी ही रही.अभी 46 ही को पहुंचे थे कि एक दिन अचानक ग़ुस्से का दौरा पड़ा. उन्हें उठाकर हयात बख़्श बाग़ भेज दिया गया, लेकिन ये बाग़ भी बादशाह की ज़िंदगी की घड़ियां लंबी नहीं कर सका और वो सारी रात बेहोश रहने के बाद अगले दिन चल बसे. उन्हें निज़ामुद्दीन औलिया की मज़ार में अमीर ख़ुसरो के बराबर में दफ़न किया गया.ये अप्रैल की 15 तारीख़ थी और साल था 1748. एक लिहाज़ से ये मोहम्मद शाह के लिए अच्छा ही हुआ क्योंकि इसी साल नादिर शाह के एक जरनल अहमद शाह अब्दाली ने हिंदुस्तान पर हमलों की शुरुआत कर दी थी.

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