मिहिरकुल हुण: भारतीय इतिहास का सबसे क्रूर योद्धा

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मिहिरकुल हूण को भारत के इतिहास में सबसे क्रूर शासक माना गया है। मिहिरकुल एक हूण शासक था। 500 ईस्वी के आसपास हूणों ने भारत में प्रवेश किया था। मिहिरकुल काल का दूसरा नाम था, वह पहाड से गिरते हुए हाथी कि चिंघाड से आनंदित होता था। मिहिरकुल ने हिमालय से लेकर लंका तक के इलाके जीत लिए थे| उसने कश्मीर में मिहिरपुर नामक नगर बसाया| मिहिरकुल हूण शिव भक्त था और इसके अलावा किसी धर्म को नहीं मानता था .

कहा जाता है कि एक बार मिहिरकुल ने बौद्ध धर्म के बारे में जानने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को निमंत्रण भेजा था। बौद्ध भिक्षुओं ने अपने गुरु की जगह अपने सेवक को बौद्ध ज्ञानी बता कर उसके पास भेज दिया। जब मिहिरकुल को इस बात का पता चला तो वो बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो गया। जिसके बाद उसने बौद्ध धर्म और उसके अनुयायियों को खत्म करने का प्रण ले लिया। इसके बाद उसने बौद्धधर्मियों का कत्ले-आम शुरु कर दिया और कई बौद्ध मंदिरों को तहस-नहस  कर दिया। मिहिरकुल ने भारत के सबसे पुराने धरोहर नालंदा विश्वविद्यालय पर भी हमला किया था।। मिहिरकुल ने उत्तर भारत से बौद्धों  का नामो-निशान मिटा दिया|

मिहिरकुल अधिक समय तक राज्य न कर सका। हूणों की बर्बरता ने उत्तरी भारत के शासकों में नवीन स्फूर्ति डाल दी थी। अत: यशोधर्मन के नेतृत्व में इन शासकों ने उसे हराया। मिहिरकुल ने इस यशोधर्मन का  आधिपत्य स्वीकार कर लिया। मगध शासक बालादित्य पर जब मिहिरकुल ने आक्रमण किया तो उसने एक द्वीप में शरण ली। मिहिरकुल ने उसका पीछा किया पर वह स्वयं पकड़ा गया। उसका वध न कर, उसे मुक्त कर दिया गया। मिहिरकुल की अनुपस्थिति में उसके छोटे भाई ने राज्य पर अधिकार कर लिया अत: कश्मीर में मिहिरकुल ने शरण ली। यहाँ के शासक का वध कर वह सिंहासन पर बैठ गया। उसने स्तूपों और संघारामों को जलाया और लूटा। एक वर्ष बाद उसका देहांत हो गया और उसी के साथ हूण राज्य का भी अंत हो गया।

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