गुरु अर्जुन देव : जब जहाँगीर ने हैवानियत की इन्तेहा पार कर दी

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बादशाह अकबर की मृत्यु पर ‘नूरुद्दीन मोहम्मद जहाँगीर’ के उपनाम से तख्त पर बैठा। जहाँगीर हमेशा अफीम के नशे में मस्त रहता था .शासन की पूरी बागडोर उसकी प्रिय रानी नूरजहाँ के हाथों में थी .सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव की ह्त्या जहाँगीर के शासनकाल की प्रमुख घटना है .जहांगीर के बेटे खुसरो के विद्रोह के दौरान गुरु अर्जुन देव ने उनका साथ दिया था .

जहाँगीर का सबसे बड़ा पुत्र ख़ुसरो, जो ‘मानबाई’ से उत्पन्न हुआ था, रूपवान, गुणी और वीर था। अपने अनेक गुणों में वह अकबर के समान था, इसलिए बड़ा लोकप्रिय था। अकबर भी अपने उस पौत्र को बड़ा प्यार करता था। जहाँगीर के कुकृत्यों से जब अकबर बड़ा दुखी हो गया, तब अपने अंतिम काल में उसने ख़ुसरो को अपना उत्तराधिकारी बनाने का विचार किया था। फिर बाद में सोच-विचार करने पर अकबर ने जहाँगीर को ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। नूरजहाँ की शासन में दखलंदाजी से नाराज खुसरो ने अपने मामा मानसिंह एवं ससुर मिर्ज़ा अजीज कोका की शह पर अप्रैल, 1606 ई. में अपने पिता जहाँगीर के विरुद्ध उसने विद्रोह कर दिया। जहाँगीर ने ख़ुसरो को आगरा के क़िले में नज़रबंद रखा, परन्तु ख़ुसरो अकबर के मक़बरे की यात्रा के बहाने भाग निकला।

लगभग 12000 सैनिकों के साथ ख़ुसरों एवं जहाँगीर की सेना का मुक़ाबला जालंधर के निकट ‘भैरावल’ के मैदान में हुआ। इस युद्ध में गुरु अर्जुन देव ने खुसरो का साथ दिया .युद्ध में जहाँगीर की जीत हुई और गुरु और ख़ुसरों को पकड़ कर क़ैद में डाल दिया गया।

जहाँगीर गुरु अर्जुन देव की लोकप्रियता से काफी डरा हुआ था और किसी भी कीमत पर उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था. उसने इस युद्ध के हर्जाने के तौर तीन शर्तें गुरु के सामने रखी जिसे उन्होंने मानने से इंकार कर दिया .नाराज जहाँगीर ने उनकी ह्त्या का आदेश दे दिया .गुरु अर्जुन देव जी को लाहौर में 30 मई 1606 ई. को भीषण गर्मी के दौरान ‘यासा व सियासत’ कानून के तहत लोहे की गर्म तवी पर बिठाकर शहीद कर दिया गया।

‘यासा व सियासत’ के अनुसार किसी व्यक्ति का रक्त धरती पर गिराए बिना उसे यातनाएं देकर शहीद किया जाता है। गुरु जी के शीश पर गर्म-गर्म रेत डाली गई। जब गुरु जी का शरीर अग्नि के कारण बुरी तरह से जल गया तो उन्हें ठंडे पानी वाले रावी दरिया में नहाने के लिए भेजा गया, जहां गुरु जी का पावन शरीर रावी में आलोप हो गया।

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