बेटे हुमायूं से ज्यादा लगाव ही बाबर की मौत का कारण बना

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भारत में मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक बाबर कई अवगुणों के साथ कई खूबियों का भी मालिक था .उसने भारत में इब्राहीम लोदी और राणा सांगा जैसे शासकों को हराकर अपनी सत्ता कायम की .बाबर की सबसे बड़ी कमजोरी स्त्रियाँ और उसके बच्चे थे .खासकर वो अपने बेटे हुमायूं से बेहद प्यार करता था .इतिहासकारों का मानना है कि हुमायूं से अत्यधिक लगाव ही आखिरकार बाबार की मौत का कारण बना .

बाबर के 4 पुत्रों- हुमायूँ, कामरान, अस्करी और हिन्दाल में हुमायूँ सबसे बड़ा था। बाबर ने हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। भारत में राज्याभिषेक के पूर्व 1520 ई. में 12 वर्ष की अल्पायु में उसे बदख्शाँ का सूबेदार नियुक्त किया गया। बदख्शाँ के सूबेदार के रूप में हुमायूँ ने भारत के उन सभी अभियानों में भाग लिया, जिनका नेतृत्व बाबर ने किया था। बाबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही हुमायूँ को गद्दी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

इतिहासकारों के मुताबिक बाबर ने अपने बेटे हुमायूं को अपनी जागीर संभालने भेजा था। वहां वह बेहद बीमार पड़ गया। उसे गंभीर हालत में नाव से आगरा लाया गया।आगरा किले में उसकी हालत ज्‍यादा ही खराब हो गई। उसका इलाज कर रहे हकीमों ने हाथ खड़े कर दिए। उस वक्‍त हुमायूं की बीमारी की कारगर दवा हकीमों को समझ में नहीं आ रही थी।’तब उस वक्‍त के मशहूर फकीर अबूबका ने बाबर से अपनी सबसे कीमती वस्‍तु दान करते हुए खुदासे हुमायूं की जिंदगी के लिए प्रार्थना करने को कहा। बाबर ने स्‍वयं को सबसे कीमती बताया और हुमायूं की पलंग की परिक्रमा करते हुए कहा कि हुमायूं की बीमारी उस पर आ जाए।’

कहा जाता है कि इसके बाद बाबर बीमार हो गया। उसकी हालत बिगड़ने लगी। दूसरी ओर हुमायूं स्‍वस्‍थ होने लगा। जब हुमायूं पूरी तरह ठीक हो गया, तब 26 दिसम्‍बर 1530 को आगरा में बाबर की मृत्‍यु हो गई।
उसके शव को अस्‍थाई रूप से जमुना पार चार बाग में रखा गया और बाद में उसकी इच्‍छानुसार काबुल ले जाकर अंतिम रूप से दफना दिया गया। बाबर की मृत्‍यु के चार दिन बाद 30 दिसम्‍बर 1530 को हुमायूं आगरा के सिंहासन पर बैठा।

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