जब औरंगजेब ने भाई दारा शिकोह का सर काट कर शाहजहाँ की भोजन की थाली में परोस दिया

औरंगज़ेब ने दारा के सर को भोजन की थाली में सजा कर गुलाम के जरिये बूढ़े बीमार बाप शाहजहां के पास पहुंचा दिया। औरंगज़ेब की इस क्रूरता और अपने प्यारे शहजादे का ये हश्र देख शाहजहां भय और शोक से बेहोश हो गया। ये था औरंगज़ेब वास्तविक चरित्र।

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भारतीय इतिहास में मुग़ल सम्राट औरंगजेब जैसा विरोधाभासी चरित्र शायद ही कहीं और देखने को मिले। अधिकांश इतिहासकार निजी जीवन में औरंगज़ेब को कट्टर मुसलमान और इस्लाम के उसूलों पर चलने वाले व्यक्ति के तौर चित्रित करते हैं लेकिन बात जब सत्ता की आती है तो लगभग सभी इतिहासकार इस बात से एकमत हैं कि औरंगज़ेब एक कठोर दिल, क्रूर और सत्तामद में चूर रहने वाला इंसान था. अपने उत्तराधिकार की लड़ाई में उसने अपने भाईयों के साथ क्या किया इसका तो उसके कठोर समर्थक भी निंदा करते हैं. खैर

औरंगज़ेब ने अपने भाई शुजा और मुराद की ह्त्या थोड़ी नरमी के साथ की लेकिन बड़े भाई दारा शिकोह की ह्त्या में उसने हैवानियत की सारी हदें तोड़ दी. समोरगढ़ की लड़ाई में दारा औरंगज़ेब से हार कर गुजरात होता हुआ कच्छ की तरफ भाग निकला था। वहां उसने अफगान सरदार मलिक जीवन से शरण माँगी लेकिन मालिक जीवन ने दारा को बंदी बनाकर औरंगज़ेब के हवाले कर दिया। औरंगज़ेब ने दारा और उसके बेटे सिफिर शिकोह को खुजली वाले हाथी पर बैठा दिल्ली की तप्ती गर्मी में पूरे नगर में घुमाकर जलील किया और बंदीगृह में डाल दिया. राजधानी में दारा के काफी समर्थक थे जिससे औरंगज़ेब को विद्रोह का डर था इसलिए वो किसी भी कीमत पर दारा को जीवित नहीं छोड़ना चाहता था. औरंगज़ेब के इस इरादे को परवान चढ़ाया दारा के मामा शायस्ता खान और बहन रोशन आरा ने। ये दोनों चाहते थे की दारा का कांटा हमेशा के लिए निकाल फेंका जाए। औरंगजेब ने एक दिन दारा को फांसी पर लटकाने का हुक्म सूना दिया।

दारा को जब सूली पर लटकाने सैनिक उसके पास पहुंचे तो उसने सैनिकों पर कटार से हमला कर दिया। इस भगदड़ में एक सैनिक ने उसका सर कलम कर दिया ,दारा को मौत के घाट उतरने के बाद औरंगजेब के सामने सबूत के तौर उसका सर पेश किया गया। औरंगज़ेब ने दारा के सर को भोजन की थाली में सजा कर गुलाम के जरिये बूढ़े बीमार बाप शाहजहां के पास पहुंचा दिया। औरंगज़ेब की इस क्रूरता और अपने प्यारे शहजादे का ये हश्र देख शाहजहां भय और शोक से बेहोश हो गया। ये था औरंगज़ेब वास्तविक चरित्र।

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