शिवाजी महाराज का निधन:क्या अपनों के ही शिकार हुए थे महाराज ?

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3 अप्रैल 1680 को शिवाजी महाराज की मौत हो गई .आख़िरी समय में वो काफी बीमार रहते थे ,इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज की मौत को लेकर कई तरह के संशय बरक़रार है, कई लोगों का कहना है कि महाराज को उनके सरदारों ने ही जहर देकर मार डाला तो कईयों ने महाराज की दूसरी पत्नी सोयराबाई पर शिवाजी महाराज को जहर देने का शक जताया है .इस मान्यता को तब और बल मिला जब शिवाजी की मौत के बाद उत्तराधिकार की लड़ाई में सोयराबाई के भाई हम्मीर्राव मोहिते ने संभा जी का साथ दिया .हालाँकि इस बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि शिवाजी महाराज की मौत की वजह सोयराबाई ही हैं.

छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र संभा जी के बीच अनबन की बातें भी कई इतिहासकारों ने लिखी है .ये भी सच है कि जीवन के अंतिम दिनों में शिवाजी महाराज ने संभा जी को पन्हाला के किले में कैद रखने का हुक्म दिया था .दरअसल संभा जी और शिवाजी महाराज के विश्वस्त सरदारों के बीच नहीं जमती थी .इसलिए ये सरदार संभा के खिलाफ शिवाजी महाराज के कान भरते रहते थे .इस अनबन की दूसरी कड़ी थी महाराज की दूसरी पत्नी और संभाजी की सौतेली मां सोयरा बाई मोहिते जो संभा जी की जगह अपने बेटे राजाराम को महाराज का वारिस बनाना चाहती थी .

1680 को शिवाजी महाराज ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया .जिसके बाद सोयराबाई बाई ने मोरोपंत पिंगले और बालाजी चिटनिस जैसे सरदारों की मदद से दस साल के राजाराम को गद्दी पर बैठा दिया. हालाँकि ज्यादातर सरदार राजाराम को महाराज का वारिस मानने को तैयार नहीं थे .जैसे ही पन्हाला किले में बंद संभा जी को इसकी खबर लगी उन्होंने अपने विश्वस्त सरदारों के साथ राजाराम पर हमला बोल दिया .इस लड़ाई में सोयराबाई के भाई हम्मीर्राव मोहिते ने भी उनका साथ दिया था .युद्ध में संभा जी की विजय हुई और उन्होंने राजाराम और सोयराबाई को कैद कर लिया .राजाराम को नौ सालों तक कैद में रखा गया और सोयराबाई का क़त्ल कर दिया गया.

सोयराबाई के क़त्ल से ऐसा लगता है कि संभा जी को भी शक था कि शिवाजी महाराज की मौत एक साजिश के तहत हुई थी .

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