अकबर नहीं राजा मान सिंह की आन की वजह था हल्दीघाटी का युद्ध

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राणा प्रताप के राणा बनने से चार साल पहले ही 1568 में मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर मुग़लों का कब्ज़ा हो चुका था. जिसे मुक्त करने के लिए राणा अकबर से लोहा ले रहे थे .राणा के मामले में अकबर को अपने योद्धाओं पर ज्यादा भरोसा नहीं था इसलिए अकबर चाहता था की राणा को समझा बुझा कर अपने पाले में कर लिया जाए और उसे मेवाड़ का राजा बना कर अपने अधीन कर लिया जाए.

अकबर ने पहले राजा टोडरमल को प्रताप के पास भेजा लेकिन टोडरमल को इसमें सफलता नहीं मिली तो राजा मान सिंह को प्रताप को समझाने भेजा गया। मान सिंह अकबर का सेनापति और रिश्तेदार था। जोधाबाई रिश्ते में मान सिंह की बुआ लगती थी। राजपूताने में मान सिंह की काफी इज्जत थी लेकिन राणा प्रताप उनसे बेहद नफरत करते थे। मान सिंह जब राणा से मिलने पहुंचे तो उनका भव्य स्वागत हुआ। जब मान सिंह को खाना परोसा गया तो राणा ने ये कहते हुए उनके साथ खाने से इंकार कर दिया कि जिहोने मलेच्छों के घर बेटियां ब्याही हैं वो उनके साथ भोजन नहीं कर सकते। मान सिंह अपमानित होकर प्रताप के गढ़ से लौटे और राणा को सबक सिखाने का प्रण ले लिया.

मान सिंह और प्रताप के बीच इस कटुता की परिणिति हल्दी घाटी की लड़ाई में हुई जहाँ 21 जून, 1576 को तपती दोपहरी में दोनों फ़ौजें आमने-सामने खड़ी हुईं.मान सिंह ने इस युद्ध को अपनी आन का सवाल बना रखा था जबकि प्रताप के लिए तो ये जीवन-मरण का प्रश्न था। मान सिंह ने पूरी शक्ति से आक्रमण किया लेकिन राजपूतों के सामने उनकी एक ना चली और जल्द ही उनके पाँव उखड़ते नजर आने लगे। मान सिंह को थोड़ी सफलता तब मिली जब मुग़ल सैनिकों ने राणा के हाथी रामप्रसाद को कैद कर लिया। रामप्रसाद के कैद से आगबबूला हुए राणा चेतक पर बैठ सीधे मान सिंह के सामने पहुँच गए और भाले से मान सिंह पर वार किया। ये राणा की बदकिस्मती थी कि भाला मान सिंह की जगह उनकी महावत को लगा और मान सिंह बच गए। यही वो क्षण था जब इस युद्ध का फैसला हो गया।

मान सिंह के हाथी की सूंढ़ में तलवार बंधी थी जो चेतक के पैरों में लगी और चेतक बुरी तरह घायल हो गया । राणा प्रताप बुरी तरह घिर गए। राणा की तरफ से ध्यान बंटाने के लिए झाला मान सिंह ने पीछे से मान सिंह पर वार करना शुरू किया और इसी बीच राजपूत सैनिक राणा को वहां से निकाल ले गए. राणा के युद्ध क्षेत्र से निकलते ही राजपूतों में अफ्तरातफ़री फ़ैल गई. चेतक महाराणा को तो सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफल रहा लेकिन खुद उसे प्राण गंवाने पड़े।

इस लड़ाई को मान सिंह जीतकर भी हार गए। राणा के बच निकलने से नाराज अकबर ने मान सिंह को काफी अपमानित किया। इस तरह अहम् की इस लड़ाई में मान सिंह ने राणा प्रताप के हाथों बुरी तरह मात खाई। जिसका गम उन्हें ज़िंदगी भर सालता रहा.

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