पेशवा बालाजी विश्वनाथ:एक असैनिक योद्धा जिसने मराठा साम्राज्य की सूरत बदल दी

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भारत के इतिहास में बाजीराव पेशवा पर काफी कुछ कहा और लिखा गया है .लेकिन उनके पिता बालाजी विश्वनाथ के बारे में काफी कम जानकारी मिलती है. ये बालाजी विश्वनाथ ही थे जो मुगलों की कैद में रहे शाहूजी महाराज से मिलने में सफल रहे थे.उन्होंने कई बार शाहूजी को इस कैद से मुक्त करवाने की कोशिश भी की हालाँकि इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी. बाला जी कोई सैनिक नहीं थे .वो बड़ी मुश्किल से घोड़े पर चढ़ पाते थे. .उन्हें तलवार चलाना भी नहीं आता था .इसके बावजूद वो शाहू जी के पेशवा यानि प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे .ये वाकई आश्चर्यजनक बात है .

मुगलों के कैद से मुक्त होने के बाद जब शाहूजी महाराज ने ताराबाई से युद्ध शुरू किया तो ताराबाई ने धनाजी जाधव को अपना प्रधान सेनापति नियुक्त किया .लेकिन जाधव शाहू जी से मिल गया .जाधव की मौत के बाद शाहूजी ने उनके बेटे चंद्रसेन को अपना सेनापति बनाया जो पहले से ही ताराबाई का वफादार था. शाहूजी को जल्द ही चंद्रसेन की हकीकत पता चल गई और उन्होंने अपने विश्वस्त बालाजी विश्वनाथ को अपना मंत्री बना लिया .बालाजी एक चतुर कूटनीतिज्ञ थे, उन्होंने ताराबाई के कई बड़े सरदारों को शाहूजी के पक्ष में ला खड़ा किया जिससे खुश होकर शाहूजी ने उन्हें अपना पेशवा यानि प्रधानमंत्री बना लिया .प्रधानमंत्री बनते ही बाला जी ने पहले चंद्रसेन को रास्ते से हटाया और ताराबाई के सेनापति कान्होजी आंग्रे को शाहूजी के पक्ष में लाकर ताराबाई से बिना लड़े जीत हासिल करने का करिश्मा कर दिखाया .

ताराबाई का काँटा निकालने के बाद बालाजी ने शाहू साम्राज्य को समृद्ध बनाने का काम शुरू किया .उन्होंने नगर के बड़े सेठों से मोटी रकम वसूली कर शाहू जी की तिजौरी भर दी .इसके बाद उन्होंने मुगलों से संधि कर दक्षिण में मुगलों के 6 सूबों से कर वसूल करने के अधिकार हासिल करने के अलावा मुगलों की कैद से शाहूजी की माता और विश्वस्त मराठों को मुक्त कर लिया .इस तरह बालाजी विश्वनाथ ने शाहूजी के साम्राज्य को चारो तरह से सुरक्षित कर दिया .12 अप्रैल 1720 को बालाजी की मृत्य हो गई .उनके बाद उनका बेटा बाजीराव पेशवा बना जो अपने पिता से विपरीत एक कुशल योद्धा था .कूटनीतिज्ञ पिता का योद्धा पुत्र खुद शाहूजी महाराज के लिए एक सुखद आश्चर्य था.

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