बाबर ने मेदिनी राय को हराकर शुरू किया राजपूतों से रिश्तेदारी का सिलसिला

कहा जाता है की बाबर अपने निश्चय पर दृढ़ था और उसने एक ही रात में अपनी सेना से पहाड़ी को काट डालने का अविश्वसनीय कार्य कर डाला। उसकी सेना ने एक ही रात में एक पहाड़ी को ऊपर से नीचे तक काटकर एक ऐसी दरार बना डाली, जिससे होकर उसकी पूरी सेना और साजो-सामान ठीक क़िले के सामने पहुँच गये।

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खानवा के मैदान में बाबर और राणा सांगा के बीच हुए युद्ध के परिणाम ने भारत का भाग्य निर्धारित कर दिया .इस युद्ध में बाबर विजयी हुआ और उसने भारत में मुग़ल सल्तनत की नींव डाली .राणा सांगा को पराजित करने बाद बाबर राजपूतों की शक्ति से अच्छी तरह वाकिफ हो चुका था .इसलिए उसने सोचा कि अगर भारत में अपनी सत्ता कायम रखनी है तो राजपूतों को कमजोर करना होगा. इसी मकसद से उसने 7 अप्रैल 1526 को बुंदेलखंड की सीमा पर स्थित चंदेरी पर आक्रमण करने का निश्चय किया जिसके राजा मेदिनी राय थे .मेदिनी राय की ख्याति काफी थी और उन्हें राणा सांगा  के बाद राजपूतों का प्रमुख माना जाता था. बाबर ने चंदेरी पर घेरा डाल दिया .

चंदेरी का क़िला आसपास की पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यह क़िला बाबर के लिए काफ़ी महत्व का था।  बाबर की सेना में हाथी, तोपें और भारी हथियार थे, जिन्हें लेकर उन पहाड़ियों के पार जाना दुष्कर था और पहाड़ियों से नीचे उतरते ही चंदेरी के राजा की फौज का सामना हो जाता, इसलिए राजा आश्वस्त व निश्चिन्त था। कहा जाता है की बाबर अपने निश्चय पर दृढ़ था और उसने एक ही रात में अपनी सेना से पहाड़ी को काट डालने का अविश्वसनीय कार्य कर डाला। उसकी सेना ने एक ही रात में एक पहाड़ी को ऊपर से नीचे तक काटकर एक ऐसी दरार बना डाली, जिससे होकर उसकी पूरी सेना और साजो-सामान ठीक क़िले के सामने पहुँच गये।

सुबह राजा अपने क़िले के सामने पूरी सेना को देखकर भौचक्का रह गया। परन्तु राजपूत राजा ने बिना घबराए अपने कुछ सौ सिपाहियों के साथ मुग़लों की विशाल सेना का सामना करने का निर्णय लिया। मेदिनी राय के सरदार खुद अपने हाथों से अपनी-अपनी  स्त्रियों का वध कर नंगी तलवारें लिए बाबर के सामने आ डटे। मेदिनी राय के नेतृत्व में राजपूतों ने घोर युद्ध किया लेकिन हार गए। 

 जब बाबर और उसकी सेना क़िले के अन्दर पहुँची तो उसके हाथ कुछ ना आया। राजपूतों का शौर्य और राजपूत स्त्रियों के जौहर के इस अविश्वसनीय कृत्य से वह इतना बोखलाया कि उसने खुद के लिए इतने महत्त्वपूर्ण क़िले का संपूर्ण विध्वंस करवा दिया तथा कभी उसका उपयोग नहीं किया। युद्ध में राजपूत सेना की हार हुई। राजा मेदिनी राय ने बाबर से संधि कर उसकी अधीनता को स्वीकार कर लिया और संधि के अनुसार मेदिनी राय की दो पुत्रियों का विवाह बाबर के पुत्र कामरान एवं हुमायूँ से कर दिया गया।  

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