इस राजा के कारण भगोड़े हुमायूं ने दोबारा दिल्ली पर किया कब्ज़ा

राणा सांगा की मृत्य के बाद मालदेव राठौड़ मारवाड़ का राजा बना। राजपूतों में उसकी बड़ी साख थी और वो खुद को राजपूतों का संरक्षक समझता था. लेकिन उसने आसपास के सभी राजपूत राजाओं को हराकर अपने अधीन कर लिया। उसकी नजर दिल्ली पर भी थी लेकिन वो दिल्ली पर खुद नहीं बल्कि एक कठपुतली शासक चाहता था जो उसके इशारों पर काम कर सके। दूसरी तरफ उसे आशंका थी की शेरशाह के सुलतान बन जाने के बाद उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है। इसलिए उसने फारस में छुपे बैठे हुमायूं को सन्देश भेजा की अगर वो वापस हिन्दुस्तान आना चाहें तो वो उनकी मदद करने को तैयार है।

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राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को भारत आमंत्रित किया था तो उनके राजपूत सरदारों ने शेरशाह से मुक्ति पाने के लिए चौसा की लड़ाई में हार कर हिन्दुस्तान से भागे हुमायूं को पुनः दिल्ली पर काबिज़ होने के लिए आमंत्रित किया। ये कहना अनुचित नहीं होगा की राजपूतों की आपसी लड़ाई ही भारत में मुगलों की नींव मजबूत करने में सहायक हुई।

राणा सांगा की मृत्य के बाद मालदेव राठौड़ मारवाड़ का राजा बना। राजपूतों में उसकी बड़ी साख थी और वो खुद को राजपूतों का संरक्षक समझता था. लेकिन उसने आसपास के सभी राजपूत राजाओं को हराकर अपने अधीन कर लिया। उसकी नजर दिल्ली पर भी थी लेकिन वो दिल्ली पर खुद नहीं बल्कि एक कठपुतली शासक चाहता था जो उसके इशारों पर काम कर सके। दूसरी तरफ उसे आशंका थी की शेरशाह के सुलतान बन जाने के बाद उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है। इसलिए उसने फारस में छुपे बैठे हुमायूं को सन्देश भेजा की अगर वो वापस हिन्दुस्तान आना चाहें तो वो उनकी मदद करने को तैयार है। मालदेव का भरोसा पाने के बाद हुमायूं भारत की तरफ लौटा लेकिन उसे यहाँ पहुँचने में 13 महीने लग गई। इसी बीच शेरशाह को मालदेव के इस कदम के बारे में पता चल गया और उसने मालदेव को धमकी दी की अगर उसने हुमायूं को शरण दी तो वो उसे नेस्तनाबूद कर देगा। शेरशाह के डर से मालदेव अपने वचन से मुकर गया और हुमायूं सिंध की तरफ भाग निकला।

हुमायूं के भागने के बावजूद शेरशाह ने मालदेव को माफ़ नहीं किया और उसे सबक सिखाने के लिए उसपर चढ़ाई कर दी। शेरशाह से युद्ध में हारकर मालदेव सिवाना की तरह भाग गया। शेरशाह ने मारवाड़ को अपने अधीन कर लिया। मालदेव की खुशकिस्मती से केवल दो महीने बाद ही शेरशाह की मौत हो गई और उसने पुनः मारवाड़ का जीत कर उसका राजा बन बैठा. शेरशाह के उत्तर्राधिकारी कमजोर साबित हुए और हुमायूं ने वापस आकर हिन्दुस्तान पर कब्जा जमाकर मुग़ल सल्तनत की नींव को मजबूर कर लिया।

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