अकबर:हेमू की बदनसीबी ने अकबर को बनाया हिन्दुस्तान का सम्राट

5 नवम्बर 1556 को पानीपत के मैदान में दोनों सेनाएं आमने-सामने आ डटी। इतिहास में यह युद्ध पानीपत के दूसरे युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। हेमू की सेना संख्या में अधिक थी तथा उसका तोपखाना भी अच्छा था किंतु एक तीर उसकी आँख में लग जाने से वह बेहोश हो गया। हेमू को लड़ाई के मैदान में गिरते देख  उसकी सेना भाग खड़ी हुई . हेमू को पकड़कर अकबर के सम्मुख लाया गया.अकबर हेमू को कैद करना चाहता था लेकिन बैरम खान ने अकबर की मर्जी के विरुद्ध हेमू का क़त्ल कर दिया .इस तरह दिल्ली से हिन्दुओं की सत्ता का अंत हो गया और अकबर को दिल्ली का सम्राट घोषित कर दिया गया। 

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27 जनवरी 1556 को दिल्ली में शेरमंडल स्थित अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर हुमायूं की मौत हो गई। अकबर को पिता की मौत का संचार तब मिला जब वो पंजाब में शेरशाह के वंशज सिकंदर शूर से लड़ाई में व्यस्त था। अकबर के संरक्षक बैरम खान ने वहीं ईंटों का सिहासन बनाकर १० फरवरी 1556 को उसका राज्याभिषेक कर दिया। इस तरह केवल 13 साल की उम्र में अकबर बादशाह बन गया। 

जब अकबर बादशाह बना तो उसे विरासत में छिन्न-भिन्न सामाज्य मिला जो चारों तरह मुसीबतों से घिरा हुआ था। शेरशाह के वंशज तो उनके दुश्मन थे ही लेकिन सबसे बड़ा ख़तरा था आदिलशाह का प्रधानमंत्री हेमू उर्फ़ हेमचन्द्र विक्रमादित्य जिसे दिल्ली का आख़िरी हिन्दू सम्राट माना जाता है। हेमू ने अकबर के सरदारों को हराकर दिल्ली पर अधिकार कर लिया और खुद को दिल्ली का बादशाह घोषित कर दिया। अगर अकबर की हिन्दुस्तान में मुग़ल सल्तनत को बचाये रखना था तो हेमू से मुकाबला बेहद जरूरी था.

बैरम खान की सलाह पर अकबर ने हेमू से युद्ध करने का निश्चय किया। 5 नवम्बर 1556 को पानीपत के मैदान में दोनों सेनाएं आमने-सामने आ डटी। इतिहास में यह युद्ध पानीपत के दूसरे युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। हेमू की सेना संख्या में अधिक थी तथा उसका तोपखाना भी अच्छा था किंतु एक तीर उसकी आँख में लग जाने से वह बेहोश हो गया। हेमू को लड़ाई के मैदान में गिरते देख  उसकी सेना भाग खड़ी हुई . हेमू को पकड़कर अकबर के सम्मुख लाया गया.अकबर हेमू को कैद करना चाहता था लेकिन बैरम खान ने अकबर की मर्जी के विरुद्ध हेमू का क़त्ल कर दिया .इस तरह दिल्ली से हिन्दुओं की सत्ता का अंत हो गया और अकबर को दिल्ली का सम्राट घोषित कर दिया गया। 

हेमू की मौत के बाद कोई भी ऐसा शासक नहीं बचा जो अकबर की सत्ता को चुनौती दे सके। छोटे-मोटे सरदारों को अकबर ने जल्द ही निपटा दिया एक साल के भीतर अकबर ने हिन्दुस्तान में मुग़ल सल्तनत की नींव को बेहद पुख्ता कर लिया.

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