जहाँगीर:अकबर ने मजबूरी में सलीम को बनाया मुग़ल सल्तनत का वारिस

अकबर सलीम को दंड देना चाहता था लेकिन उसकी मजबूरी ये थी कि अकबर के तीन पुत्रों में केवल सलीम ही जीवित बचा था और खुद अकबर भयंकर बीमारी से ग्रस्त हो चुका और उसे अपना आख़िरी समय निकट लगने लगा। मजबूरी में ही सही अकबर ने २१ अक्टूबर 1605 को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। 26 अक्टूबर को अकबर की मौत हो गई और 24 अक्टूबर को जहांगीर ने खुद अपने हाथों से मुगलिया पगड़ी रखकर खुद को हिंदुस्तान का बादशाह घोषित कर दिया। 

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सम्राट अकबर ने मुगलों में औरंगजेब के बाद सबसे अधिक दिनों तक शासन किया .अकबर अपने राजकीय व्यवस्था से संतुष्ट था लेकिन उसकी सबसे बड़ी परेशानी खुद उसका पुत्र सलीम यानी जहाँगीर था. जहाँगीर एक विलासी ,उच्छृंखल और व्यसनी युवराज था जिसकी वजह से अकबर उसपर कड़ी निगाह रखता था. इसके बावजूद सलीम के दिल में केवल 22 साल की उम्र में सम्राट बनने का मोह सवार हो गया और उसने अकबर के खिलाफ विद्रोह कर दिया. 

 1599 में अकबर ने सलीम को भारीभरकम सेना के साथ मेवाड़ के राजा अमर सिंह जो राणा प्रताप के बेटे थे पर आक्रमण के लिए भेजा। सलीम ने मेवाड़ जाने के बजाय प्रयाग का रुख किया। उसने प्रयाग में खुद को हिंदुस्तान का सम्राट घोषित कर दिया और आस-पास के क्षेत्रों को जीतना शुरू कर दिया. जब अकबर को सलीम के इस विद्रोह की खबर मिली तो वो बौखला गया। उसने 1601 में सलीम के घेर लिया। डर के मारे सलीम ने आत्मसमपर्ण कर दिया. अकबर ने उसे माफ़ कर दिया और उड़ीसा और बंगाल का गर्वनर बना कर खुद से दूर भेज दिया। लेकिन सलीम बंगाल जाने के बजाय इलाहाबाद में जम  गया. 

इस बार भी सलीम अपनी आदतों से बाज नहीं आया उसने फिर से दरबार लगाना शुरू  कर दिया. इस बार उसने गोवा के पुर्तगालियों से मदद लेकर अकबर के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। अकबर ने अपने मित्र अबुल फज़ल को सलीम को समझाने  भेजा तो उसने अबुल फज़ल की ह्त्या करवा दी। अकबर के लिए अबुल फज़ल की ह्त्या असहनीय थी. अकबर ने सलीम पर चढ़ाई कर उसे बंदी बना कर आगरे के किले में कैद कर दिया।  अकबर उसे मृत्युदंड देकर उसके बेटे खुसरो को अपना वारिस बनाना चाहता था। जैसे ही इसकी खबर जनानखाने को लगी अकबर की मा मरियम मकानी ने हस्तक्षेप किया और अकबर को वचन दिया की वो सलीम को सही रास्ते पर लाएगी। मरियम मकानी आगरा गई और सलीम को लेकर अकबर के पास पहुंची। अकबर सलीम से इतना खफा था की उसने सलीम को पहले तो जूतों से मारा फिर गुसलखाने में कैद करवा दिया। 

अकबर सलीम को दंड देना चाहता था लेकिन उसकी मजबूरी ये थी कि अकबर के तीन पुत्रों में केवल सलीम ही जीवित बचा था और खुद अकबर भयंकर बीमारी से ग्रस्त हो चुका और उसे अपना आख़िरी समय निकट लगने लगा। मजबूरी में ही सही अकबर ने २१ अक्टूबर 1605 को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। 26 अक्टूबर को अकबर की मौत हो गई और 24 अक्टूबर को जहांगीर ने खुद अपने हाथों से मुगलिया पगड़ी रखकर खुद को हिंदुस्तान का बादशाह घोषित कर दिया। 

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