शाहजहां:वफादार ससुर के कारण मिला मुग़ल सल्तनत का ताज

1628 की फरवरी के आख़िरी हफ्ते  में शाहजहाँ आगरा पहुंच गया और एक बड़े जलसे के साथ मुग़ल सिहांसन पर बैठ कर खुद को सम्राट घोषित कर दिया .इस तरह शाहजहाँ मुग़ल सल्तनत का पांचवां सम्राट बना .

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नमस्कार दोस्तों ! मुग़ल सम्राटों की सीरिज में हम फिलहाल केवल उन स्थितियों की जानकारी दे रहे हैं जब इन सम्राटों ने सल्तनत की गद्दी हासिल की .इस कड़ी में हम जहाँगीर के बाद आज शाहजहाँ का जिक्र करेंगे ,शाहजहाँ जहाँगीर के पुत्रों में खुसरो से छोटा था. स्वाभाविक तौर पर खुसरो को ही जहाँगीर का उत्तराधिकारी माना जा रहा था. लेकिन खुसरो ने जहाँगीर के खिलाफ तीन बार विद्रोह किया .जहाँगीर ने उसे अंधा कर कैद में डाल दिया .इसी बीच खुर्रम यानी शाहजहाँ ने खुसरो को मरवाकर अपना रास्ता साफ़ कर लिया लेकिन फिर भी मंजिल इतनी आसान नहीं थी .

जहाँगीर के शासनकाल में नूरजहाँ ही राजकाज चलाती थी. जहाँगीर की मौत के बाद भी वो इस स्थिति को कायम रखना चाहती थी इसलिए वो चाहती थी कि उसका दामाद शहरयार जहांगीर का वारिस बने .ऐसा हो भी  जाता लेकिन नूरजहाँ के भाई आसिफ खान जो शाहजहाँ का ससुर था ने अपनी बहन का साथ देने से इनकार कर दिया .जब जहाँगीर की मौत हुई तब शाहजहाँ आगरे से दूर युद्ध में व्यस्त था. सिहासन खाली ना रहे इसलिए आसफ खान ने खुसरो के पुत्र दावर बक्श को गद्दी पर बिठाकर शाहजहाँ को जल्द से जल्द राजधानी पहुँचने को कहा. जब तक शाहजहाँ आगरा पहुंचता शहरयार ने खुद को सम्राट घोषित कर दिया और शाही खजाने को अपने कब्जे में ले लिया .लेकिन आसफ खान ने उसे युद्ध में परास्त कर उसे बंदी बना लिया और उसकी आँखें फोड़ डाली.

शाहजहाँ तेजी से आगरे की तरफ बढ़ रहा था .शहरयार प्रकरण से सबक लेते हुए शाह्जहं ने आसफ खान को सन्देश भेजा कि उसके राजधानी पहुँचने तक सिहांसन के सारे दावेदारों की ह्त्या कर दी जाए .आसफ खान ने ऐसा ही किया उसने दावर बक्श की भी ह्त्या कर दी .

1628 की फरवरी के आख़िरी हफ्ते  में शाहजहाँ आगरा पहुंच गया और एक बड़े जलसे के साथ मुग़ल सिहांसन पर बैठ कर खुद को सम्राट घोषित कर दिया .इस तरह शाहजहाँ मुग़ल सल्तनत का पांचवां सम्राट बना .

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