जहांदार शाह :लाल कुंवर के कारण गंवाई सल्तनत और जिंदगी

अप्रैल 1712 में उसके भतीजे फर्रुख्सियर ने उसके खिलाफ विद्रोह कर दिया. शाह ने अपने पुत्र को फर्रुख्सियर का विद्रोह दबाने भेजा लेकिन वो हार गया और मारा गया .मजबूरन जहादार शाह को खुद सेना की अगुआई करनी पडी. 10 जनवरी 1713 को फर्रुख्सियर और जहादार्शाह की सेना के बीच युद्ध हुआ जिसमें फर्रुख्सियर की जीत हुई. हार के बाद उसने अपनी दाढी मूंछ मुडवा ली और लालकुंवर के साथ एक बैलगाड़ी पर बैठ कर आगरा से दिल्ली भाग गया.

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‘बाबर ने मुग़ल राज्य के भवन के लिए मैदान साफ़ किया, हुमायूँ ने उसकी नीव डाली, अकबर ने उस पर सुंदर भवन खड़ा किया, जहाँगीर ने उसे सजाया−सँवारा, शाहजहाँ ने उसमें निवास कर आंनद किया; किंतु औरंगज़ेब ने उसे विध्वंस कर दिया था।औरंगजेब के बाद उसके सारे उत्तराधिकारी निकम्मे और विलासी साबित हुए .औरंगजेब का बेटा बहादुरशाह प्रथम की मौत के बाद उसके पुत्रों में सल्तनत के लिए जंग छिड़ गई जिसमें जहानदार शाह की जीत हुई और वो 29 मार्च 1712 को गद्दी पर बैठा .


जहांदार शाह अत्यंत विलासी और निकम्मा शासक था .वो हमेशा लालकुंवर नामक वेश्या के साथ भोग विलास में रमा रहता. उसने शासन की कुंजी लालकुंवर के हाथों में सौंप रखी थी और उसके सारे रिश्तेदारों को दरबार में ऊँचे ऊँचे पदों पर तैनात कर दिया था. शाह के इस रवैये के कारण असंतोष फैलने लगा .

अप्रैल 1712 में उसके भतीजे फर्रुख्सियर ने उसके खिलाफ विद्रोह कर दिया. शाह ने अपने पुत्र को फर्रुख्सियर का विद्रोह दबाने भेजा लेकिन वो हार गया और मारा गया .मजबूरन जहादार शाह को खुद सेना की अगुआई करनी पडी. 10 जनवरी 1713 को फर्रुख्सियर और जहादार्शाह की सेना के बीच युद्ध हुआ जिसमें फर्रुख्सियर की जीत हुई. हार के बाद उसने अपनी दाढी मूंछ मुडवा ली और लालकुंवर के साथ एक बैलगाड़ी पर बैठ कर आगरा से दिल्ली भाग गया.

दिल्ली पहुँच कर उसने अपने वजीर असद खान से सहायता माँगी लेकिन असद खान ने उसे गिरफ्तार कर फर्रुख्सियर को सौंप दिया .11 फरवरी 1713 को उसकी ह्त्या कर दी गई .जहादार शाह केवल दस महीने ही शासन कर सका ,उसकी मौत के बाद फर्रुख्सियर ने खुद को मुग़ल सम्राट घोषित कर दिया .

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