Farrukhsiyar:वजीर के डर से जनानखाने में छुपने वाला मुग़ल सम्राट

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जहांदार शाह के बाद फर्रुखसियर 11 जनवरी 1713 को मुग़ल सल्तनत के सिहांसन पर बैठा .फर्रुखसियर अब तक के  सभी सुल्तानों में सबसे निकम्मा और बेवकूफ शासक साबित हुआ .वो सैय्यद बंधुओं की मदद से गद्दी पर बैठा था लेकिन बाद में उनके खिलाफ ही साजिशें करना लगा जो उसके लिए आत्मघाती साबित हुआ .

मार्च 1713 में फर्रुखसियर और सैय्यद बंधुओं के बीच कलह की शुरुआत हो गई .दोनों भाइयों ने दरबार में आना छोड़ दिया जिससे फर्रुखसियर काफी घबरा गया और उनसे माफी मांगने जा पहुंचा. दोनों भाई मान तो गए लेकिन इस बार उन्होंने सत्ता पर अपनी पूरी पकड़ बना ली जिससे फर्रुखसियर काफी चिंतित हो गया .शासन के सारे फैसले सैय्यद बंधू ही लेते थे .जाहिर है फर्रुखसियर को अपनी सत्ता हाथ से निकलती हुई लगी. उसने एक बार फिर सैय्यद बंधुओं  के खिलाफ षड़यंत्र शुरू कर दिया.

सैय्यद  बंधुओं ने सम्राट के सारे विश्वासपात्र लोगों को अपनी ओर मिला लिया .इन भाइयों ने जो सबसे बड़ा काम किया वो ये था कि सल्तनत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके मराठा राजा शाहूजी महाराज से एक संधि की जिसके मुताबिक़ मराठों को दक्खन के प्रदेशों में कर वसूली की छूट दे दी .उन्होंने मुगलों की कैद में रह रही शाहूजी की माता और भाइयों को आजाद कर शाहूजी का विश्वास जीत लिया .मराठों  से संधि होते ही सैय्यद बंधू ही असली शासक बन बैठे और अब वो फर्रुखसियर को सबक सिखाने की योजना बनाने लगे. 

27 फरवरी 1719 को सैय्यद  बंधुओं    ने महल में घुसकर अपने पहरेदार तैनात कर दिए .फर्रुखसियर डर के मारे जनानखाने में जा कर छुप गया. सैनिकों ने फर्रुखसियर को गद्दी छोड़ने या मौत में से किसी एक को चुनने को कहा .फर्रुखसियर ने जिन्दगी चुनी और अपनी पगड़ी सैय्यद बंधुओं   के चरणों में रख दी .उसे गिरफ्तार कर पहले अंधा किया गया फिर कैदखाने में डाल दिया गया .27 अप्रैल को फर्रुखसियर का गला घोंटकर उसे मार डाला गया और हुमायूं के मकबरे के पास दफना दिया गया. 

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