अहमद शाह :मुग़ल दरबार को हिजड़ों का अड्डा बनाने वाला बादशाह

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मुहम्मद शाह की मौत के बाद उसका बेटा अहमदशाह 28 अप्रैल 1748 को मुग़ल गद्दी पर बैठा। अहमदशाह केवल 23 साल का था और उसे राजकाज का कोई अनुभव नहीं था. बाप मुहम्मदशाह जहां तवायफों और वेश्याओं का शौक़ीन था वहीं अहमदशाह शाह अय्याशी में अपने बाप का भी बाप निकला। उसने अपने प्रिय हिजड़ों के सरदार जावेद खां को नवाब बहादुर की पदवी दे कर उसे दरबार में ऊँचे पद पर बहाल कर दिया। नवाब बहादुर ने दरबार में अपने परिवारवालों को भरकर मुग़ल दरबार को हिजड़ों का अड्डा बना डाला। अहमदशाह नवाब बहादुर के हाथों की कठपुतली बन कर रह गया.

नवाब बहादुर ने षड्यंत्र कर वजीर सफ़दर जंग को उसके पद से हटाने कोशिशें शुरू कर दी जिसकी वजह से उसका राजमाता मलका -ए-जमानी से मतभेद हो गया. सफदरजंग ने इस मतभेद का फायदा उठाते हुए नवाब बहादुर को रास्ते से हटा दिया. नाराज अहमदशाह ने सफ़दर जंग को उसके पद से बर्खास्त कर दिया। सफ़दर जंग एक काबिल और बहादुर योद्धा था। उसने अहमदशाह को सबक सिखाने के लिए जाटराजा सूरजमल से हाथ मिला कर शाही सेना पर हमला कर दिया। इससे डरकर अहमदशाह ने सफदरजंग और सूरजमल से संधि कर ली.

इधर अहमदशाह के प्रधानमंत्री इमाद-उल-मुल्क ने मराठा सरदार मल्हारराव होलकर को सम्राट पर आक्रमण के लिए उकसाया। होल्कर अपनी सेना सहित दिल्ली पर जा चढ़ा। जब अहमदशाह को होल्कर के आने का पता चला तो वो अपनी मां के साथ दिल्ली से भागने की कोशिश करने लगा लेकिन पकड़ लिया गया। होल्कर ने सम्राट को इमाद-उल-मुल्क को वजीर बनाने के लिए उसे विवश कर दिया. मुल्क ने अहमदशाह को गद्दी से उतारकर आलमगीर द्वितीय को सिहासन पर बिठा दिया और अहमदशाह और उसकी मां की आँखें निकाल कर उन्हें कैद में डाल दिया.

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