महमूद गजनवी ने हर साल भारत पर आक्रमण करने की खाई थी कसम

1024 में उसने सोमनाथ मंदिर को भयंकर तरीके से लूटा और मंदिर को नष्ट करने की पूरी कोशिश की .महमूद मंदिर की अतुल संपदा के साथ शिवलिंग के टूटे टुकड़े भी साथ लेकर गया और गजनी के मस्जिद की सीढ़ियों पर लगवा दिया.

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भारतवर्ष पर अरबों और विदेशियों के कई आक्रमण हुए .उन्होंने ना केवल भारत की विपुल संपदा को जीभर के लूटा बल्कि बल्कि यहाँ की प्राचीन संस्कृति को भी नष्ट-भ्रष्ट कर दिया .इन आक्रमणकारियों में सबसे खतरनाक था महमूद गजनवी जो भारत पर राज नहीं बल्कि पूरी भारतीय संस्कृति का इस्लामीकरण करना चाहता था. महमूद ने भारत पर हर साल आक्रमण करने की कसम खाई थी. उसने कुल 17 बार भारत पर आक्रमण किया .

महमूद गजनवी का भारत पर पहला आक्रमण सन 1000 इसवी में हुआ. लेकिन इस हमले में उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली. उसने अगले साल फिर आक्रमण किया. इस बार उसका मुकाबला हिन्दू राजा जयपाल से हुआ .युद्ध में जयपाल की हार हुई और महमूद ने जीभर कर लूट मार मचाई और काफी धन संपदा लेकर वापस लौट गया. महमूद धन का लालची था और कट्टर सुन्नी मुसलमान था. हिन्दू हो या शिया मुसलमान सब उसकी नजर में काफिर थे और उन्हें मिटाना ही वो अपना धर्म समझता था.

पिछले कुछ लूट में उसे भारत से भारी धनसंपदा हाथ लगी थी .शेर के मुंह में खून लग ही चुका था. 1024 में उसने सोमनाथ मंदिर को भयंकर तरीके से लूटा और मंदिर को नष्ट करने की पूरी कोशिश की .महमूद मंदिर की अतुल संपदा के साथ शिवलिंग के टूटे टुकड़े भी साथ लेकर गया और गजनी के मस्जिद की सीढ़ियों पर लगवा दिया.

सन 1027 में महमूद आख़िरी बार भारत आया. इस बार उसने जाटों पर हमला बोला और उन्हें जीभर के लूटा .ये महमूद का भारत पर अंतिम आक्रमण था .तीन साल बाद उसकी मौत हो गई.

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