Jalal-ud-din Khalji:भतीजे पर भरोसा इस सुल्तान को महंगा पड़ा

अलाउद्दीन खिलजी काफी महत्वाकांक्षी शख्स था. वो दिल्ली के शासन पर बैठना चाहता था. जल्लालुद्दीन के शासन काल में अलाउद्दीन ने कई साहसिक आक्रमण किये और उनमें उन्हें जीत हासिल हुई . जल्लालुद्दीन ने खुश होकर उसे अपना दामाद बना लिया .जलाल अलाउद्दीन पर आँख मूँद कर भरोसा करता था. इसी का फायदा उठाते हुए उसने ने उसके खिलाफ षड़यंत्र शुरू कर दिया.

0
1212

गयासुद्दीन बलवान के वारिस कैकुबाद ने जलालुद्दीन खिलजी को अपना प्रधान सेनापति और बुलंदशहर का सूबेदार नियुक्त किया था. कैकुबाद को अचानक लकवा मार गया तब उसके तीन साल के बेटे को दिल्ली के सिंहासन पर बैठाया गया .जलालुद्दीन ने उस बच्चे की ह्त्या कर उसे यमुना नदी में फेंक दिया और खुद को दिल्ली का सुलतान घोषित कर दिया .

जल्लालुद्दीन एक बहादुर योद्धा और बुद्धिमान शासक था. जिस समय वो गद्दी पर बैठा उसकी उम्र 70 साल की थी. उम्र के बढ़ते प्रभाव के कारण जलालुद्दीन को युद्ध से विरक्ति हो गई और उसने अपनी जनता और दुश्मनों को अपनी सह्रदयता से जीतने की नीति अपनाई .जलालुद्दीन ये भूल गया की तलवार के बल पर हथियाए गए साम्राज्य को तलवार से ही कायम रखा जा सकता है .जलालुद्दीन की इस उदारता को उसके विरोधियों ने उसकी कमजोरी समझा और उसके खिलाफ षड्यंत्र होने लगे. कई बार वो षड़यंत्र का शिकार होते-होते बाल-बाल बचा .लेकिन अपनी इसी उदारता के कारण वो अपने भतीजे अलाउद्दीन के जाल में फंस गया और मारा गया.

अलाउद्दीन खिलजी काफी महत्वाकांक्षी शख्स था. वो दिल्ली के शासन पर बैठना चाहता था. जल्लालुद्दीन के शासन काल में अलाउद्दीन ने कई साहसिक आक्रमण किये और उनमें उन्हें जीत हासिल हुई . जल्लालुद्दीन ने खुश होकर उसे अपना दामाद बना लिया .जलाल अलाउद्दीन पर आँख मूँद कर भरोसा करता था. इसी का फायदा उठाते हुए उसने ने उसके खिलाफ षड़यंत्र शुरू कर दिया.

अलाउद्दीन ने जलालुद्दीन से पूछे बिना देवगिरी पर आक्रमण कर दिया और भयंकर लूट-पाट कर कीमती खजाने हासिल कर लिए .ये बात जलालुद्दीन को खटक गई और उसने अलाउद्दीन को दरबार में हाजिर होने का हुक्म दिया. अलाउद्दीन ने सन्देश भेजा की वो सुलतान से काफी डरा हुआ है और उनसे माफी मांगना चाहता है इसलिए उसकी ख्वाहिश है कि सुलतान मानिकपुर में ही आकर उनसे मिलें .अलाउद्दीन की ये चालाकी काम कर गई और सुलतान अपने भतीजे से मिलने मानिकपुर जा पहुंचे .

जैसे ही दोनों मिले अलालुद्दीन ने सारे खजाने जलाल को सौंप दिए जिससे खुश होकर सुलतान ने अलाउद्दीन को गले लगा लिया. इधर इशारा पाते ही अलाउद्दीन के एक सरदार ने जलाल की पीठ में खंजर घोप दिया .जैसे ही जलाल जमीन पर गिरा अलाउद्दीन ने उसका सर धड से अलग कर दिया. बाद में अलाउद्दीन ने खुद को सुलतान घोषित कर दिया और जलालुद्दीन के कटे हुए सर को पूरे राज्य में घुमा घुमा लोगों को दिखाया ताकि लोगों पर उसका भय व्याप्त हो जाए .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here