Alauddin Khalji:अपनों ने ही लूटा,गैरों में कहां दम था

अलाउद्दीन भयंकर रूप से बीमार पडा जिसका फायदा उठाकर मालिक काफूर ने खिज्र खां और उसकी बीबी को कैद कर लिया. महान विजेता अलाउद्दीन खिलजी बेबसी से अपने सबसे विश्वसनीय सरदार का ये कारनामा देखता रहा लेकिन कुछ नहीं कर सका .मौक़ा देख मालिक काफूर ने बीमार अलाउद्दीन की ह्त्या कर दी और खुद को सल्तनत का संरक्षक घोषित कर दिया .

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अलाउद्दीन खिलजी को नया भारत केवल पद्मावती प्रकरण के कारण जानता है, लेकिन दिल्ली का सुलतान अलाउद्दीन खिलजी इससे कहीं ज्यादा जानने का हकदार है .इतिहासकारों का मत है कि अलाउद्दीन एक क्रूर ,अन्यायी ,लालची और निर्दय शासक था लेकिन साथ ही एक कर्मठ सैनिक ,कुशल सेनापति,महान कूटनीतिग्य और विजेता भी था. स्पष्ट है की अलाउद्दीन खिलजी का व्यक्तित्व दो विरोधाभासी व्यक्तित्व का अद्भुत संगम था.

अलाउद्दीन खिलजी 20 साल की उम्र में अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी का क़त्ल कर सुलतान बना था. कई इतिहासकार इस क़त्ल को उसकी पत्नी के व्यवहार के कारण उपजे असंतोष का परिणाम मानते हैं.अलाउद्दीन जलाल का दामाद था. जलाल की बेटी को सुलतान की बेटी होने का घमंड था इसलिए वो अक्सर अलाउद्दीन से दुर्व्यवहार करती थी .इससे अलाउद्दीन के दिल में अपने चाचा से विश्वासघात की भावना उपजी हालाँकि वो जलाल से बेहद मुहब्बत करता था .खैर… सुलतान बनते ही अलाउद्दीन ने जलाल के पूरे परिवार का क़त्ल करवा दिया ताकि उनके सामने कोई चुनौती बाकी ना बचे .इसके बाद उसने अपना विजय अभियान शुरू किया .
सम्पूर्ण राजस्थान को जीतने के बाद उसने गुजरात ,मालवा जीता और फिर दक्षिण भारतीय राज्यों पर हमला बोला जिसमें देवगिरी पर विजय उसके लिए काफी लाभदायक साबित हुई .अलाउद्दीन को इससे काफी धन-संपदा हाथ लगी .

अथक परिश्रम और बढ़ती उम्र के साथ अलाउद्दीन काफी थक चुका था. अपने विरोधियों को क्रूरता से मारने वाला अलाउद्दीन खिलजी खुद अपने घर में ही खुद को असुरक्षित महसूस करता था .इसकी वजह थी उसका बेटा खिज्र खान और उसकी बीबी मल्लिका-ए-जहां का षड्यंत्र .ये दोनों अलाउद्दीन के खिलाफ षड़यंत्र रच रहे थे .अलाउद्दीन के सरदार मलिक काफूर ने जब इसकी जानकारी सुलतान को दी तो अलाउद्दीन ने उनकी नकेल कसनी शुरू की .इसी बीच अलाउद्दीन भयंकर रूप से बीमार पडा जिसका फायदा उठाकर मालिक काफूर ने खिज्र खां और उसकी बीबी को कैद कर लिया. महान विजेता अलाउद्दीन खिलजी बेबसी से अपने सबसे विश्वसनीय सरदार का ये कारनामा देखता रहा लेकिन कुछ नहीं कर सका .मौक़ा देख मालिक काफूर ने बीमार अलाउद्दीन की ह्त्या कर दी और खुद को सल्तनत का संरक्षक घोषित कर दिया .

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